
महराजगंज। भगवान बुद्ध के ननिहाल के रूप में प्रसिद्ध देवदह, बनर्सिहा कला में तीन दिवसीय प्रशिक्षण, विपश्यना एवं देवदह महोत्सव कार्यक्रम का आयोजन शुरू हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न प्रदेशों से आए बौद्ध भिक्षुओं ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से बने विपश्यना हॉल का ताला नहीं खुलने पर बौद्ध भिक्षुओं और देवदह समिति के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताते हुए पुरातत्व विभाग के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
कार्यक्रम के दिन भी नहीं खुला हॉल का ताला
महराजगंज के सांसद एवं केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी के प्रयासों से करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से विपश्यना हॉल का निर्माण कराया गया है। हालांकि, देवदह महोत्सव के आयोजन के दिन भी हॉल का ताला नहीं खुल सका। इससे कार्यक्रम में शामिल होने आए बौद्ध भिक्षुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
20 वर्षों से आयोजित हो रहा कार्यक्रम
देवदह-रामग्राम बौद्ध विकास समिति के अध्यक्ष जितेंद्र राव ने बताया कि समिति पिछले करीब 20 वर्षों से यहां कार्यक्रम आयोजित करती आ रही है। इस बार भी आयोजन की जानकारी पहले ही पुरातत्व विभाग को दे दी गई थी। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन को लेकर लखनऊ स्थित पुरातत्व विभाग के अधिकारियों और महराजगंज के जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया था। समिति को आश्वासन मिला था कि कार्यक्रम के दिन हॉल खोल दिया जाएगा, लेकिन आयोजन के दिन भी ताला नहीं खुला।
बौद्ध भिक्षुओं को हुई परेशानी, प्रशासन से हॉल खुलवाने की मांग
जितेंद्र राव के मुताबिक, विपश्यना हॉल नहीं खुलने के कारण कार्यक्रम में शामिल बौद्ध भिक्षुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। समिति के पदाधिकारियों और बौद्ध भिक्षुओं ने जिला प्रशासन तथा पुरातत्व विभाग से हॉल का ताला खुलवाने की मांग की है, ताकि धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन सुचारु रूप से किया जा सके। देवदह को भगवान बुद्ध के ननिहाल से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में यहां आयोजित होने वाले बौद्ध कार्यक्रमों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग एक बार फिर सामने आई है।