
महराजगंज। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना (PM Internship Scheme) में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। योजना का दायरा टॉप-500 कंपनियों से आगे बढ़ाकर एमएसएमई (MSME) और सनराइज सेक्टर तक किया गया है। इसके अलावा मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर ₹9,000 करने, उम्र और शैक्षणिक योग्यता से जुड़ी शर्तों में ढील देने तथा इंटर्नशिप की अवधि में बदलाव जैसे कदम उठाए गए हैं।
इन बदलावों के बाद योजना के तीसरे राउंड में युवाओं की भागीदारी में सुधार देखने को मिला है। हालांकि, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, कंपनियों की ओर से पोस्ट किए गए कुल इंटर्नशिप अवसरों की तुलना में ज्वाइन करने वाले उम्मीदवारों की संख्या अब भी 10 प्रतिशत से कम है। इससे योजना के क्रियान्वयन और युवाओं की अपेक्षाओं के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
पीएम इंटर्नशिप योजना: तीनों राउंड के आंकड़े
राउंड-1: 1.27 लाख से ज्यादा इंटर्नशिप अवसर
योजना के पहले राउंड में कंपनियों ने कुल 1,27,508 इंटर्नशिप अवसर पोस्ट किए थे। इनके लिए लगभग 6.21 लाख आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 60,866 उम्मीदवारों को ऑफर दिए गए, लेकिन केवल 8,760 उम्मीदवारों ने ही इंटर्नशिप ज्वाइन की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ज्वाइन करने वाले उम्मीदवारों में से 3,731 युवाओं ने अपनी इंटर्नशिप पूरी की। यह संख्या ज्वाइन करने वाले उम्मीदवारों का लगभग 42.6 प्रतिशत है।
राउंड-2: ऑफर मिलने के बाद भी कम जॉइनिंग
दूसरे राउंड में कंपनियों की ओर से 1,18,948 इंटर्नशिप पद पोस्ट किए गए, जिनके लिए लगभग 4.55 लाख आवेदन मिले। इस दौरान 71,192 उम्मीदवारों को ऑफर दिए गए, लेकिन केवल 7,308 युवाओं ने ही ज्वाइन किया। इनमें से 2,880 उम्मीदवारों ने इंटर्नशिप पूरी की। यह ज्वाइन करने वाले युवाओं का लगभग 39.4 प्रतिशत है।
राउंड-3: जॉइनिंग रेट में सुधार
अप्रैल 2026 में शुरू हुए तीसरे राउंड में 340 कंपनियों ने कुल 1,54,366 इंटर्नशिप अवसर पोस्ट किए। इनके लिए 3,50,259 आवेदन प्राप्त हुए। इस राउंड में 25,794 उम्मीदवारों को ऑफर दिए गए, जबकि अब तक 14,620 उम्मीदवारों ने इंटर्नशिप ज्वाइन की है। इन आंकड़ों के आधार पर कुल पोस्ट किए गए अवसरों के मुकाबले जॉइनिंग दर लगभग 9.5 प्रतिशत है। पिछले राउंड की तुलना में यह सुधार जरूर है, लेकिन कंपनियों की ओर से उपलब्ध कराए गए अवसरों के मुकाबले जॉइनिंग अब भी 10 प्रतिशत से कम बनी हुई है।
आखिर बीच में इंटर्नशिप क्यों छोड़ रहे हैं युवा?
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत उम्मीदवारों के इंटर्नशिप छोड़ने के पीछे अलग-अलग कारण सामने आए हैं। कुछ युवाओं का कहना है कि उन्हें उनकी शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी कौशल के अनुरूप काम नहीं दिया गया। रांची के एक युवक ने बताया कि उसने कंप्यूटर हार्डवेयर में डिप्लोमा किया था और वह कंप्यूटर मेंटेनेंस से जुड़ी व्यावहारिक ट्रेनिंग हासिल करना चाहता था। हालांकि, उसके अनुसार, उसे गांवों में लोन एजेंट के तौर पर फील्ड वर्क और लोन रिकवरी से जुड़े काम दिए गए। तकनीकी कौशल सीखने का अवसर नहीं मिलने के कारण उसने इंटर्नशिप छोड़ने का फैसला किया।
कुछ उम्मीदवारों ने दूसरी फुल-टाइम नौकरी मिलने को भी इंटर्नशिप छोड़ने की वजह बताया। ऐसे मामलों में युवाओं ने बेहतर रोजगार अवसर मिलने पर इंटर्नशिप जारी रखने के बजाय नई नौकरी को प्राथमिकता दी।
पेट्रोल पंपों पर प्रचार का काम मिलने की भी शिकायत
एक अन्य उम्मीदवार ने बताया कि उसने बीबीए के पहले वर्ष में एक तेल रिफाइनरी कंपनी में इंटर्नशिप ज्वाइन की थी। उसके अनुसार, उसे पेट्रोल पंपों पर जाकर ग्राहकों से कंपनी के ऐप के माध्यम से भुगतान करवाने और कैशबैक ऑफर का प्रचार करने का काम दिया गया। उम्मीदवार का आरोप था कि इस काम में उसे अपेक्षित कौशल विकास और कार्यालय से जुड़ी ट्रेनिंग का अवसर नहीं मिला। इसी वजह से उसने इंटर्नशिप छोड़ दी। इन अनुभवों से संकेत मिलता है कि केवल इंटर्नशिप के अवसर उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। युवाओं को उनकी पढ़ाई, रुचि और करियर की जरूरतों के अनुसार काम तथा उपयोगी प्रशिक्षण मिलना भी जरूरी है।
आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बेहतर अनुभव
जहां कुछ क्षेत्रों में इंटर्नशिप के दौरान दिए जाने वाले काम को लेकर शिकायतें सामने आई हैं, वहीं आईटी और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में कुछ उम्मीदवारों ने सकारात्मक अनुभव भी साझा किए हैं।
युवक के मुताबिक, उसने जनवरी 2025 में एक आईटी कंपनी में इंटर्नशिप शुरू की थी। इस दौरान उसे चार महीने की इंस्ट्रक्टर-लेड ट्रेनिंग, दो महीने की सेल्फ-पेस्ड डिजिटल लर्निंग और छह महीने की ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी गई। युवक ने बताया कि 12 महीने की इंटर्नशिप पूरी करने और भर्ती परीक्षा में शामिल होने के बाद मार्च 2026 में उसे उसी आईटी कंपनी में फुल-टाइम नौकरी मिल गई। उसका अनुभव इस बात का उदाहरण है कि यदि इंटर्नशिप के दौरान व्यवस्थित प्रशिक्षण और वास्तविक कार्य अनुभव मिले, तो यह युवाओं के लिए स्थायी रोजगार का रास्ता बन सकती है।
प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना का उद्देश्य युवाओं को कंपनियों में व्यावहारिक अनुभव देकर रोजगार के लिए तैयार करना है। स्टाइपेंड बढ़ाने और योजना का दायरा विस्तृत करने जैसे कदम युवाओं को आकर्षित कर सकते हैं, लेकिन जॉइनिंग और इंटर्नशिप पूरी करने की दर बढ़ाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसके लिए कंपनियों को उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप काम, बेहतर प्रशिक्षण, स्पष्ट जिम्मेदारियां और भविष्य में रोजगार की संभावनाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा। साथ ही, इंटर्नशिप छोड़ने वाले उम्मीदवारों की समस्याओं को समझकर उनका समाधान करना जरूरी है।