
महराजगंज। गन्ना किसानों का बकाया भुगतान नहीं करने का असर अब JHV शुगर मिल गड़ौरा पर पड़ा है। गन्ना आयुक्त ने आगामी पेराई सत्र के लिए गड़ौरा मिल को गन्ना देने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। इसके बाद गड़ौरा क्षेत्र के गन्ने को कुशीनगर, गोरखपुर और महराजगंज की दूसरी चीनी मिलों को देने का फैसला लिया गया है। इससे गड़ौरा मिल के अगले पेराई सत्र में चलने पर संकट खड़ा हो गया है।
पिछले पेराई सत्र में गड़ौरा चीनी मिल को 60.73 लाख क्विंटल गन्ना मिला था। लेकिन इस बार किसानों का बकाया भुगतान लंबित होने और मिल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए गन्ना आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। गन्ना आयुक्त के आदेश के अनुसार, गड़ौरा क्षेत्र के कई गन्ना क्रय केंद्रों का गन्ना दूसरी मिलों को दिया गया है। इनमें कुशीनगर की हाटा और रामकोला, गोरखपुर की पिपराइच और महराजगंज की सिसवा बाजार चीनी मिल शामिल हैं।
किस मिल को कितना गन्ना मिला?
पिपराइच चीनी मिल: जयश्री प्रथम केंद्र से 1.84 लाख क्विंटल गन्ना और पिपराकाजी प्रथम व द्वितीय केंद्रों से 0.78 लाख क्विंटल गन्ना।
हाटा चीनी मिल: जयश्री द्वितीय केंद्र से 1.20 लाख क्विंटल और लेदी, बजहा प्रथम, मिश्रौलिया प्रथम, बैठवलिया व झुलनीपुर केंद्रों से कुल 8.55 लाख क्विंटल गन्ना।
रामकोला चीनी मिल: पिपराकाजी प्रथम व द्वितीय केंद्रों के अलावा मिश्रौलिया द्वितीय केंद्र से 1.20 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित किया गया है।
सिसवा बाजार चीनी मिल: डोमा फार्म, बहुआर, बजही और बजहा द्वितीय केंद्रों से कुल 7.70 लाख क्विंटल गन्ना दिया गया है।
वहीं, गड़ौरा मिलगेट के 12.84 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति पिपराइच, हाटा और रामकोला चीनी मिलों को संयुक्त रूप से किए जाने का उल्लेख आवंटन तालिका में है।
महराजगंज जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर जमीन पर गन्ने की खेती होती है। इस साल औसतन 715 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन के अनुमान के आधार पर करीब 1.43 करोड़ क्विंटल गन्ना पैदा होने की उम्मीद है। गड़ौरा मिल को गन्ना आवंटित नहीं होने से उसके क्षेत्र के किसानों को अब दूसरी चीनी मिलों के क्रय केंद्रों पर गन्ना पहुंचाना होगा। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए नई व्यवस्था के अनुसार काम करना पड़ेगा।
गड़ौरा चीनी मिल को गन्ना आवंटन नहीं मिलने के पीछे किसानों के बकाया भुगतान का मामला अहम है। भुगतान लंबित रहने और बकाया चुकाने की जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं होने के कारण मिल को आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ना नहीं दिया गया है। अब देखना होगा कि किसानों के बकाया भुगतान और मिल के संचालन को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।