
महराजगंज। सिसवा नगरपालिका क्षेत्र के सिसवाखुर्द गांव में 2.416 हेक्टेयर भूमि को लेकर चल रहे विवाद में राजस्व न्यायालय ने अहम फैसला सुनाया है। निचलौल के उपजिलाधिकारी अवनीश त्रिपाठी की अदालत ने वर्ष 2001 में पारित राजस्व आदेश को निरस्त कर दिया है। इस फैसले के बाद विवादित भूमि से जुड़े मामले की नए सिरे से सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है।
विवादित भूमि सिसवाखुर्द गांव के 14 गाटों से संबंधित है। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन पहले बंजर श्रेणी में दर्ज थी। वर्ष 2001 में इसे बंजर खाते से हटाकर महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के नाम दर्ज करने का आदेश पारित किया गया था। इसी आदेश को लेकर अब विवाद सामने आया है। वर्ष 2001 में पारित राजस्व आदेश को चुनौती देते हुए सिसवा नगरपालिका की ओर से 19 जून 2026 को न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था। नगरपालिका का पक्ष था कि वर्ष 2019 में सिसवा नगरपालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद उक्त भूमि से जुड़े मामले में उसका हित प्रभावित होता है।
वहीं, विद्यालय प्रबंधन ने पुराने राजस्व आदेश को उचित ठहराते हुए अपना पक्ष रखा। प्रबंधन की ओर से वर्ष 1947 में पंजीकृत दानपत्र के आधार पर भूमि दिए जाने की दलील भी पेश की गई। मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और राजस्व अभिलेखों की समीक्षा के बाद एसडीएम न्यायालय ने वर्ष 2001 में पारित आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही विवादित भूमि से संबंधित मामले में आपत्तियों और साक्ष्यों के आधार पर आगे सुनवाई का रास्ता खुल गया है।
अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 28 अक्टूबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। अब आगामी सुनवाई में भूमि से जुड़े दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर मामले पर आगे विचार किया जाएगा। नगरपालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि गिरिजेश जायसवाल ने कहा कि नगरपालिका सार्वजनिक भूमि के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। इस मामले में राजस्व अभिलेखों और कानूनी तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
फिलहाल, पुराने राजस्व आदेश के निरस्त होने के बाद सिसवाखुर्द की विवादित भूमि का मामला एक बार फिर चर्चा में है। हालांकि, न्यायालय के इस फैसले से भूमि के अंतिम स्वामित्व का निर्धारण नहीं हुआ है। अब सभी की नजरें 28 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।