
जिलाधिकारी ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ता है। इसे रोकने के लिए कृषि विभाग की टीमें सक्रिय रहेंगी। साथ ही न्याय पंचायत स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें किसानों को पराली के सही प्रबंधन और उसके दूसरे उपयोगों के बारे में जानकारी दी जाएगी। डीएम ने सभी तहसीलों में उपजिलाधिकारियों और थानों पर थानाध्यक्षों की अध्यक्षता में कंबाइन हार्वेस्टर मालिकों के साथ बैठक करने के निर्देश दिए। उन्होंने राजस्व, पुलिस और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें बनाकर लगातार निगरानी करने को भी कहा।
पराली का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी ने खंड विकास अधिकारियों को ग्राम प्रधानों की मदद से पराली गोशालाओं तक पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। ग्राम प्रधानों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को भी किसानों को पराली जलाने के नुकसान और इससे जुड़े कानूनी नियमों के बारे में जागरूक करने को कहा गया। कृषि विभाग के अधिकारियों को किसानों को कंबाइन हार्वेस्टर में सुपर एसएमएस लगवाने और फसल कटाई के बाद कृषि यंत्रों की मदद से अवशेषों का प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करने का निर्देश दिया गया।
डीएम ने थानाध्यक्षों को अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर निगरानी रखने को कहा। पराली जलाने की घटना सामने आने पर संबंधित किसान और कंबाइन हार्वेस्टर मालिक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित अधिकारी अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाएं और नियमों का पालन सुनिश्चित कराएं।