
एसडीएम निचलौल अवनीश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि जिला गन्ना अधिकारी की आख्या के आधार पर जिलाधिकारी कार्यालय से चीनी मिल प्रबंधन को रिकवरी नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई से मिल प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है। गड़ौरा चीनी मिल पर किसानों और कर्मचारियों के बकाये के साथ-साथ प्रदेश सरकार के गन्ना भुगतान संबंधी नियमों के उल्लंघन का भी आरोप है। नियमानुसार चीनी मिलों को किसानों से गन्ना खरीदने के 14 दिनों के भीतर उसका भुगतान करना होता है। इसके बावजूद गड़ौरा मिल पर बकाया भुगतान लंबित है।
एक समय महराजगंज जिले में करीब 40 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती थी। उस दौर में घुघली, सिसवा, गड़ौरा और फरेंदा की चार चीनी मिलें संचालित थीं। समय के साथ मिलों के बंद होने और विभागीय स्तर पर हुई मनमानी के कारण गन्ना उद्योग को बड़ा झटका लगा। वर्तमान में जिले में केवल दो चीनी मिलें संचालित हैं। इसका असर गन्ने की खेती पर भी पड़ा है और जिले में गन्ने का रकबा घटकर लगभग आधा रह गया है।
गड़ौरा चीनी मिल का आवंटन रद्द होने का सीधा असर निचलौल क्षेत्र के गन्ना किसानों पर पड़ रहा है। यह क्षेत्र लंबे समय से गड़ौरा मिल का प्रमुख गन्ना आपूर्ति क्षेत्र रहा है। विभाग का दावा है कि अब निचलौल क्षेत्र के किसानों का गन्ना कुशीनगर की हाटा और गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिलें खरीदेंगी। लेकिन किसानों की परेशानी यह है कि अभी तक इन दोनों मिलों की ओर से निचलौल की किसी भी ग्राम पंचायत में गन्ना क्रय केंद्र या कांटा स्थापित नहीं किया गया है।
क्रय केंद्रों की व्यवस्था नहीं होने से किसानों के सामने तैयार गन्ने की फसल बेचने का संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र के कई किसान मजबूरी में स्थानीय क्रशरों पर 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना बेच रहे हैं, ताकि खेती में लगी अपनी जमा पूंजी निकाल सकें। ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ा सवाल है कि जब गड़ौरा मिल बंद है और दूसरी मिलों के क्रय केंद्र अभी तक स्थापित नहीं हुए हैं, तो वे अपनी तैयार फसल आखिर कहां बेचें?
प्रशासन की ओर से जारी रिकवरी नोटिस के बाद अब सभी की निगाहें 20 नवंबर की समय सीमा पर टिकी हैं। वहीं, निचलौल क्षेत्र के गन्ना किसानों को जल्द क्रय केंद्र स्थापित होने और उनकी फसल का उचित मूल्य मिलने का इंतजार है।