
महराजगंज। जिले में ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने और नवीनीकरण कराने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अवैध वसूली का मामला सामने आया है। एआरटीओ कार्यालय और ड्राइवर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (DTI) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर पूरे मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट और फाइलों के नाम पर कथित बिचौलियों के माध्यम से आवेदकों से अतिरिक्त रकम वसूली जा रही है। उनका कहना है कि शुल्क व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अधिवक्ताओं के अनुसार पहले ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित टेस्ट महराजगंज स्थित एआरटीओ कार्यालय में कराए जाते थे। लेकिन एक जुलाई 2026 से लाइसेंस नवीनीकरण, ट्रांसपोर्ट लाइसेंस और स्थायी ड्राइविंग लाइसेंस के टेस्ट की व्यवस्था डीटीआई को सौंपे जाने की बात कही गई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि डीटीआई में फाइल और टेस्ट फीस जमा कराने के बावजूद टेस्ट पास करने की प्रक्रिया आरआई की लॉगिन के माध्यम से पूरी की जा रही है। ऐसे में अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब टेस्ट के परिणाम को पास करने की प्रक्रिया आरआई की लॉगिन से हो रही है तो डीटीआई की वास्तविक भूमिका क्या है? उन्होंने इस व्यवस्था को लेकर प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि डीटीआई में ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित विभिन्न सेवाओं और टेस्ट के लिए निर्धारित सरकारी शुल्क की स्पष्ट सूची उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इससे आवेदकों को यह जानकारी नहीं मिल पाती कि उन्हें किस सेवा के लिए कितनी फीस जमा करनी है। आरोप है कि शुल्क संबंधी जानकारी में पारदर्शिता की कमी का फायदा उठाकर कुछ कथित बिचौलिए अलग-अलग फाइलों के नाम पर मनमानी रकम मांग रहे हैं।
अधिवक्ताओं ने मांग की है कि डीटीआई परिसर में सभी सेवाओं और टेस्ट के निर्धारित शुल्क की सूची सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाए, ताकि आवेदकों को अनावश्यक आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके। शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की है कि ड्राइविंग टेस्ट लेने, उसका परिणाम दर्ज करने और अभ्यर्थी को पास घोषित करने का अधिकार किस अधिकारी या संस्था के पास है। इसके साथ ही डीटीआई में जमा कराई जा रही फीस और निर्धारित सरकारी शुल्क का मिलान कराने की मांग की गई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, जिससे लाइसेंस बनवाने वाले लोगों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई करने की मांग की।
इस दौरान एडवोकेट अकबर अली, संतोष गुप्ता, दुर्गेश श्रीवास्तव, जुगुल किशोर पटेल, अमित यादव, आशीष गुप्ता, नरसिंह यादव और धनंजय गुप्ता सहित अन्य लोग मौजूद रहे। अब शिकायत के बाद जिला प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर लोगों की नजरें टिकी हैं।