
उत्तर प्रदेश। सैनिक स्कूलों में पढ़ाई करने और सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी खबर है। रक्षा मंत्रालय सैनिक स्कूलों में दाखिले की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार अब केवल कक्षा 6 और 9 में ही नहीं, बल्कि अन्य कक्षाओं में भी खाली सीटों पर हर साल नए विद्यार्थियों को प्रवेश देने का विकल्प तैयार किया जा सकता है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य सैनिक स्कूलों में विद्यार्थियों के बीच में पढ़ाई छोड़ने यानी ड्रॉपआउट की समस्या से खाली होने वाली सीटों को भरना और प्रवेश के इच्छुक योग्य विद्यार्थियों को अतिरिक्त अवसर देना है। रक्षा मंत्रालय के एक आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार सैनिक स्कूलों में दाखिला लेने वाले कुल विद्यार्थियों में से लगभग 7 प्रतिशत छात्र किसी न किसी कारण से बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। इसके पीछे कई कारण सामने आए हैं। इनमें कम उम्र में पहली बार परिवार से दूर हॉस्टल में रहना, स्कूल के सख्त नियम, अनुशासित दिनचर्या और हॉस्टल के माहौल में खुद को ढालने में परेशानी प्रमुख हैं।
इसके अलावा कुछ विद्यार्थी मेडिकल कारणों से भी नियमित शारीरिक अभ्यास और अनुशासन वाली दिनचर्या जारी नहीं रख पाते हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत सैनिक स्कूलों में मुख्य रूप से कक्षा 6 और कक्षा 9 में प्रवेश दिया जाता है। ऐसे में अगर कक्षा 6 में दाखिला लेने के बाद कोई विद्यार्थी कक्षा 7 या 8 में पढ़ाई छोड़ देता है, तो उसकी सीट खाली रह जाती है।बीच की कक्षाओं में नए दाखिले का प्रावधान नहीं होने के कारण इन सीटों को भरने का अगला अवसर कक्षा 9 में मिलता है।
वहीं, अगर कोई विद्यार्थी कक्षा 9 या उसके बाद स्कूल छोड़ देता है तो उसकी सीट कक्षा 12 तक कई वर्षों के लिए खाली रह सकती है। इस व्यवस्था के कारण एक तरफ बड़ी संख्या में विद्यार्थी सैनिक स्कूलों में प्रवेश पाने के लिए परीक्षा देते हैं, वहीं दूसरी तरफ कई स्कूलों में सीटें लंबे समय तक खाली पड़ी रहती हैं। सैनिक स्कूलों में ड्रॉपआउट के कारण खाली होने वाली सीटों का मुद्दा रक्षा मंत्रालय से संबंधित संसदीय समिति के सामने भी उठ चुका है। समिति ने सरकार को सुझाव दिया था कि विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने से खाली होने वाली सीटों को भरने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
इससे योग्य और जरूरतमंद विद्यार्थियों को सैनिक स्कूलों में पढ़ाई का अवसर मिल सकेगा। समिति की सिफारिश के बाद रक्षा मंत्रालय इस दिशा में नए नियम तैयार करने पर विचार कर रहा है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने पर सैनिक स्कूलों की खाली सीटों पर अन्य कक्षाओं में भी हर साल प्रवेश का अवसर मिल सकता है। इससे स्कूलों की सीटों का बेहतर उपयोग होगा और प्रवेश पाने के इच्छुक विद्यार्थियों को अतिरिक्त मौका मिल सकेगा। हालांकि, यह अभी विचाराधीन प्रस्ताव है। रक्षा मंत्रालय की ओर से नए नियमों और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। यदि यह बदलाव लागू होता है तो सैनिक स्कूलों में दाखिले की व्यवस्था में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल सकता है।