
महराजगंज। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के निचलौल और मधवलिया रेंज के सिवानों में राजकीय पक्षी सारस का कुनबा बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अनुकूल वातावरण और सुरक्षित प्रजनन स्थलों के चलते इस वर्ष सारसों की संख्या में इजाफे की उम्मीद जताई जा रही है। मधवलिया रेंज के दमकी गांव के सिवान में सारस का एक जोड़ा अपने नन्हें बच्चों के साथ खेतों में विचरण करता दिखाई दिया। कुछ समय पहले इसी जोड़े ने खेत में घोंसला बनाकर अंडे दिए थे। अब अंडों से बच्चे निकलने के बाद नर और मादा सारस मिलकर उनकी देखभाल कर रहे हैं।
सारसों के प्रजनन और उनकी गतिविधियों पर वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की टीम लगातार निगरानी कर रही है। डब्ल्यूटीआई के सदस्य अरशद हुसैन ने बताया, पिछले वर्ष हुई गणना में इस क्षेत्र में करीब 375 सारस दर्ज किए गए थे। इस बार भी इनकी संख्या बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि अंतिम आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है। कुछ घोंसलों की गणना और सत्यापन का काम बाकी है।
उन्होंने बताया कि निगरानी के दौरान कई घोंसलों में दो से तीन अंडे मिले थे। अब कुछ स्थानों पर एक से दो बच्चे दिखाई देने लगे हैं। प्रजनन के अनुकूल मौसम के चलते इस वर्ष क्षेत्र के कई स्थानों पर सारसों के घोंसले देखे गए हैं। डब्ल्यूटीआई की टीम ने समय-समय पर सारसों के घोंसलों और अंडों की निगरानी की। अब कई घोंसलों से बच्चे निकलकर खेतों में विचरण करने लगे हैं। हालांकि, धान की फसल पकने और कटाई शुरू होने के साथ ही सारसों के सामने खतरा भी बढ़ गया है।
खेतों में कटाई के दौरान घोंसलों और सारस के बच्चों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में किसानों से अपील की जा रही है कि खेतों में काम करते समय सारसों की मौजूदगी का ध्यान रखें और उनके घोंसलों व बच्चों को नुकसान न पहुंचाएं।
सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के सिवानों में सारसों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण मिलने से वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों में उम्मीद जगी है। यदि घोंसलों और बच्चों की सुरक्षा बनी रहती है तो इस वर्ष सारसों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। फिलहाल डब्ल्यूटीआई की टीम क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रही है।