
लखनऊ। गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से राजधानी के कई इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। रविवार को दुबग्गा के जेहटा रोड समेत आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का पानी पहुंच गया। शाम करीब छह बजे तक जेहटा-माल रोड पर डेढ़ फीट पानी बह रहा था। माल और इटौंजा के ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
जानकारी के अनुसार, अगले 24 घंटे में गोमती नदी का जलस्तर दो फीट तक और बढ़ सकता है। इसे देखते हुए इलाकों में प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है और लोगों से अपील की है की उनको सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।
प्रशासन की टीम ने हयात नगर मोड़, दौलतखेड़ा, सैथा और बरावन कला समेत कई बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने लोगो को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी। पहली मंजिल पर रहने वाले लोगों को दूसरी मंजिल पर जाने तथा गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव के लिए 10 नावों की सुविधा शुरू की गई है। प्रशासन ने रात के समय पेट्रोलिंग बढ़ाने और दाऊद नगर में अतिरिक्त कंट्रोल रूम स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं।

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने अधिकारियों को बताया कि पानी भरने से धान, सब्जियों और अन्य फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। इसके बाद जिलाधिकारी ने एक हजार से अधिक बीघा फसल और सब्जियों के नुकसान का सर्वे कराने के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन की ओर से किसानों को नियमानुसार सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।
हयात नगर मोड़, दौलतखेड़ा और सैथा के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी का काफिला गुलमीखेड़ा, टाड़खेड़ा और सुखलालखेड़ा की ओर रवाना हुआ, लेकिन रास्ते में अधिक जलभराव होने के कारण टीम को वापस लौटना पड़ा। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली।
मंझौवा गांव में गोमती का पानी बढ़ने से करीब 500 बीघा पकी धान की फसल डूब गई। इसके अलावा खीरा, लौकी और भिंडी की फसल को भी नुकसान पहुंचा है।
किसान अजय की करीब तीन बीघा खीरे की फसल पानी में डूब गई। वहीं, बारिश और जलभराव के कारण जयकरन, इंद्रपाल, राजाराम, महेश और सरवन के घर भी गिर गए।
बाढ़ का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। फैजुल्लागंज और आसपास की कई कॉलोनियों में घरों के अंदर पानी घुसने के बाद लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों और किराये के कमरों में जाने को मजबूर हैं।
फैजुल्लागंज के नंदन चौराहे पर रहने वाली सीमा जायसवाल पिछले पांच दिनों से पानी घटने का इंतजार कर रही थीं। रविवार को स्थिति बिगड़ने के बाद वह पति और बच्चों के साथ किराये के कमरे में रहने चली गईं। कई अन्य परिवार भी मजबूरी में घर छोड़ चुके हैं। कुछ लोगों ने तीन हजार तो कुछ ने 3,500 रुपये तक में किराये के कमरे लिए हैं।
वहीं, सिलिंडर और जरूरी सामान लेकर पानी से निकल रहे शुभम भी किराये के कमरे में जाने की तैयारी में थे। सुंदरलाल भी कई दिनों से पानी घटने का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जलस्तर कम होने के बजाय बढ़ता गया। आखिरकार उन्हें भी घर छोड़ना पड़ा।
गणेश विहार कॉलोनी में मनोज के घर में भी कई दिनों से पानी भरा हुआ है।
फैजुल्लागंज के मामा चौराहा, अटल चौक, गणेश विहार, नंदन चौराहा समेत कई इलाकों में चारों तरफ पानी नजर आ रहा है। घरों में फंसे लोगों के सामने अब पेयजल का संकट भी खड़ा हो गया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घरों के नलों से बदबूदार पानी आ रहा है, जिसे पीना तो दूर, हाथ-मुंह धोने के लिए भी इस्तेमाल करना मुश्किल है। कुछ लोगों का कहना है कि पीने के पानी का वितरण किया जा रहा है, लेकिन राहत सामग्री और पानी सभी प्रभावित परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कई लोग स्थानीय स्तर पर जुगाड़ की नावों से नगर निगम के टैंकर तक पहुंचकर बाल्टियों में पानी भरकर ला रहे हैं।
बाढ़ के बीच ममता और उनके पति आशीष भी रविवार को घर से जरूरी सामान निकालकर कंट्रोल रूम के पास पहुंचे। उनके साथ गोद में करीब एक साल का बच्चा भी था। परिवार ने करीब दो घंटे तक नाव या ट्रैक्टर का इंतजार किया, लेकिन मदद नहीं मिल सकी।
ममता बच्चे को लेकर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से मदद की गुहार लगाती रहीं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि लगातार बढ़ते पानी के बीच उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और पीने के पानी समेत अन्य जरूरी सुविधाओं की आवश्यकता है।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अब गोमती के जलस्तर में अगले 24 घंटे के दौरान होने वाली वृद्धि पर सभी की नजर है।