महराजगंज के मधवलिया गोसदन में गोबर से बनेगी गैस, सिलेंडरों में भरकर बेचने की तैयारी

    02-Nov-2026
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महराजगंज। जिले के मधवलिया गोसदन में संरक्षित गोवंश का गोबर अब कमाई का जरिया बनने जा रहा है। गोबर से बायोगैस तैयार कर उसे सिलेंडरों में भरकर बेचने की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए गोसदन परिसर में गोबर गैस प्लांट स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। पशुपालन विभाग इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर रहा है। योजना के तहत गोसदन में एकत्रित होने वाले गोबर का उपयोग कर बायोगैस तैयार की जाएगी। इसके बाद गैस को आधुनिक तकनीक से शुद्ध और संपीड़ित कर सिलेंडरों में भरकर बिक्री करने की व्यवस्था प्रस्तावित है। इससे एक ओर गोबर का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण होगा, वहीं दूसरी ओर गोसदन के लिए आय का नया स्रोत भी विकसित होगा।


मधवलिया गोसदन में संरक्षित गायों के भरण-पोषण पर नियमित रूप से खर्च होता है। चारा, भूसा और पौष्टिक आहार की व्यवस्था के लिए लगातार धन की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में गोबर गैस प्लांट से होने वाली कमाई गोसदन की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है। योजना के अनुसार, गैस की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय का इस्तेमाल संरक्षित गोवंश के लिए पौष्टिक आहार खरीदने और उनके बेहतर रखरखाव पर किया जाएगा। इससे गायों के पोषण और स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद मिलेगी।


इस परियोजना से केवल ऊर्जा उत्पादन ही नहीं होगा, बल्कि जैविक खाद भी प्राप्त की जा सकेगी। बायोगैस तैयार करने के बाद बचने वाली स्लरी का इस्तेमाल खेतों में जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इससे किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए उपयोगी खाद उपलब्ध कराने की संभावना भी बनेगी। पशुपालन विभाग गोबर गैस प्लांट की स्थापना के लिए प्रस्ताव तैयार करने में जुटा है। इसमें प्लांट की क्षमता, तकनीकी जरूरतों, स्थापना पर आने वाले खर्च और गैस की बिक्री की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।


साथ ही गैस को सिलेंडरों में भरने के लिए आवश्यक तकनीक, सुरक्षा मानकों और अनुमतियों पर भी विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने और बजट उपलब्ध होने के बाद प्लांट स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। योजना धरातल पर उतरने से आसपास के क्षेत्रों में वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी नई पहल हो सकती है। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो मधवलिया गोसदन गोवंश संरक्षण के साथ-साथ बायोगैस उत्पादन, जैविक खाद और आय सृजन का एक बेहतर मॉडल बन सकता है।