
महराजगंज। जिले में क्षयरोग (टीबी) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पांच वर्ष पूर्व जहां जिले में 3,233 टीबी मरीज चिह्नित किए गए थे, वहीं इस वर्ष 1 जनवरी से 31 अक्टूबर 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 4,452 पहुंच गया है। मरीजों की बढ़ती संख्या ने क्षयरोग की रोकथाम और समय पर उपचार सुनिश्चित करने की चुनौती बढ़ा दी है। वहीं, जिले के करीब 5,900 टीबी मरीजों को लगभग 14 महीने से निक्षय पोषण योजना की आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी उन्मूलन के लिए लगातार जांच और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में नए मरीजों की पहचान होना चिंता का विषय बना हुआ है। जागरूकता की कमी, समय पर जांच नहीं कराना और संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज करना इसके संभावित कारण माने जा रहे हैं। हालांकि विभाग का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ने से पहले की अपेक्षा अधिक मरीज सामने आ रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 31 अक्टूबर तक जिले में कुल 4,452 टीबी मरीज चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 2,700 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। पांच वर्ष पहले जिले में टीबी मरीजों की संख्या 3,233 थी। अब मरीजों की पहचान में वृद्धि दर्ज की गई है। टीबी मरीजों के उपचार के साथ उनके पोषण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार की निक्षय पोषण योजना संचालित है। योजना के तहत उपचाराधीन टीबी मरीजों को पौष्टिक आहार के लिए प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।
लेकिन महराजगंज जिले में करीब 5,900 क्षयरोगियों को लगभग 14 महीने से यह सहायता राशि नहीं मिल पा रही है। आर्थिक सहायता नहीं मिलने से मरीजों को पौष्टिक आहार की व्यवस्था करने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
टीबी के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
दो सप्ताह से अधिक लगातार खांसी होना।
खांसी के साथ खून आना।
शाम के समय हल्का बुखार रहना।
रात में अत्यधिक पसीना आना।
बिना किसी स्पष्ट कारण के तेजी से वजन कम होना।
जिले में बढ़ाई गई जांच की सुविधाएं
जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. वीरेंद्र आर्या ने बताया कि पांच वर्ष पहले जिले में टीबी की जांच के लिए केवल छह ट्रूनाट मशीनें उपलब्ध थीं। अब सभी ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और संबंधित सेंटरों पर कुल 18 ट्रूनाट मशीनें उपलब्ध हैं। इसके अलावा छह स्थानों पर डिजिटल एक्सरे की सुविधा भी शुरू की गई है।
उन्होंने बताया कि गांवों तक स्क्रीनिंग और जांच की सुविधाएं पहुंचने से ऐसे मरीजों की भी पहचान हो रही है, जो पहले जांच के अभाव में सामने नहीं आ पाते थे। चिह्नित मरीजों का निशुल्क उपचार किया जाता है।स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर जांच कराने में देरी न करें। समय पर पहचान और नियमित उपचार से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है।