Maharajganj News : इफ्तार की रौनक के बीच छिपी एक कड़वी सच्चाई… क्या आपके पड़ोस में कोई भूखा तो नहीं?

    13-Mar-2026
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महराजगंज।
पवित्र माह रमजान में जहां एक रूहानी फ़िज़ा छायी हुई है, वहीं इफ्तार के समय घर-घर में नेमतों से सजे दस्तरखान भी नजर आ रहे हैं। खजूर, फल, पकौड़ी, शरबत व तरह-तरह के व्यंजनों से रोजेदारों का स्वागत हो रहा है। बावजूद इसके समाज के उन जरूरतमंद परिवारों की चिंता भी जरूरी है, जिनके घरों में इफ्तार के वक्त चूल्हा तक मुश्किल से जल पाता है।

रमजान का मकसद सिर्फ रोजा रखना नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ना व इंसानियत को जिंदा रखना है। मिठौरा मदरसे के कारी मुमताज का कहना है रमजान का असली पैगाम भूख व प्यास का एहसास कर इंसान को हमदर्द बनाना है। उन्होंने कहा कि नेमतों की कद्र उसी वक्त पूरी होती है, जब हम अपने दस्तरखान से कुछ हिस्सा निकालकर गरीबों व बेसहारा लोगों तक पहुंचाएं।


अगर हमारा पड़ोसी भूखा है तो उसको भी इफ्तार में शामिल करें। कई बार देखा जाता है कि ज्यादा पकवान बनते हैं। बचा हुआ खाना बेकार चला जाता है। जबकि उसी मोहल्ले में ऐसे परिवार भी हैं, जो बच्चों के लिए साधारण इफ्तार की व्यवस्था करने में असमर्थ हैं।

रमजान सब्र, शुक्र व बराबरी का महीना है। इस महीने में जकात, सदका व खैरात के जरिए जरूरतमंदों की मदद कर समाज में भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है। अपने आसपास नजर रखें और चुपचाप जरूरतमंद परिवारों की मदद करें।