Expert Advice For Parents : बच्चों की खामोशी को समझिए, वरना देर हो सकती है!!!

    08-Apr-2026
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महराजगंज। सोमवार को नगर क्षेत्र के एक मैरिज हॉल में महज 14 साल की लक्ष्मी की मौत ने सभी अभिभावकों और शिक्षकों में टेंशन पैदा कर दी है। लक्ष्मी ने कक्षा छह में फेल होने के दुख में आत्महत्या कर ली। कक्षा छह में फेल होने के बाद उठाए गए इस कदम ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चों के मनोभावों को समझना बेहद जरूरी है। अगर बच्चे अवसाद में हों तो उनसे बातचीत कर उनकी चिंता दूर करने की कोशिश करें लेकिन उनपर किसी बात को लेकर दबाव न डालें।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार माता-पिता के बीच विवाद, कठोर व्यवहार, घर में संवाद की कमी और बच्चों की शिकायतों को नजरअंदाज करना उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बनाता है। कई बार बच्चे नाराजगी या अवसाद में तात्कालिक प्रतिक्रिया के तौर पर आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। इसका सबसे कारण यह है कि लोगों में अब सहनशक्ति कम होती है। बच्चे नाराजगी या अवसाद में तात्कालिक प्रतिक्रिया के तौर पर ऐसे खतरनाक कदम उठा लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि लक्ष्मी के आत्महत्या की घटना से अन्य अभिभावकों को भी सबक लेकर बच्चों से बातचीत को चाहिए। ऐसी घटनाओं का सबसे बड़ा कारण मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग का अत्यधिक उपयोग बच्चों में अकेलेपन और अवसाद को जन्म दे रहा है। इसके अलावा घर में झगड़े, आर्थिक तंगी या पारिवारिक समस्याएं भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती हैं।

इन संकेतों पर रखें नज़र
* स्वभाव में अचानक बदलाव- ज्यादा गुस्सा या असामान्य चुप्पी
* दोस्तों या अपनी पसंदीदा गतिविधियों से दूरी बना लेना
* नींद और खान-पान की आदतों में बदलाव
* मौत या सुसाइड के बारे में बार-बार बात करना।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस घटना से सबक लेते हुए अभिभावकों को बच्चों के साथ कम्युनिकेशन बढ़ाना चाहिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना चाहिए।