Gorakhpur News : गोरखपुर बाईपास पर खुला विवादित कट, सुरक्षित एंट्री-एग्जिट के लिए तैयार होगा आधुनिक जंक्शन

    02-Jun-2026
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गोरखपुर।
नगर निगम द्वारा विकसित किया गया एकला बांध रिंग रोड का गोरखपुर बाईपास एनएच-27 जंक्शन के पास बनाया गया कट सोमवार देर रात फ़िलहाल आवागमन के लिए खोल दिया गया। हालाँकि हाइवे पर तेज रफ़्तार वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यहां नगर निगम द्वारा 300-300 मीटर लम्बा एक्सेलेरेशन और डी-एक्सेलेरेशन लेन बनाई जाएंगी। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक्सेस प्वाइंट विकसित करने के लिए नगर निगम, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की स्वीकृति हासिल करेगा।

सोमवार की सुबह एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर ललित प्रताप पाल, गोरखपुर इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधियों, नगर निगम के अधिशासी अभियंता अशोक कुमार भाटी एवं अवर अभियंता दीपक शाह ने संयुक्त टीम ने गोरखपुर बाईपास पर जक्शन प्वाइंट का निरीक्षण किया।

इस मुलाकात में नगर निगम ने एनएचएआई को बताया कि अभी एकला बांध का गोरखपुर बाईपास एनएच 27 पर एक्सेस नगर निगम ने नहीं दिया है, क्योंकि बांध को फोरलेन बनाने का काम अभी पूरा ही नहीं हुआ है। जहां तक क्रैश बैरियर तोड़ने का सवाल है, निगम ने अरोप लगाया कि ग्रामीणों ने तोड़ दिया होगा।

मौके पर एनएचएआई द्वारा एक्सेस बंद किए जाने के बाद भी बड़ी संख्या में बाइक सवार आवागमन करते दिखे। लेकिन सोमवार की देर रात अचानक कट के समक्ष रखा सारा मलबा हटा कर आवागमन खोल दिया गया। कहा गया कि रम्बल स्ट्रीप बनाने के लिए कट बंद किया गया था।

फोरलेन निर्माण के मिली धनराशि से होगा विशेष लेन का निर्माण
23 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों 15 करोड़ रुपये की धनराशि से लोकार्पित 2.88 किमी लम्बे एकला बांध रिंग रोड का सिर्फ नौसड़ से एकला बंधा की तरफ 1,100 मीटर लम्बा हिस्सा ही फोरलेन हैं। इसके आगे बाघागाड़ा फोरलेन तक 1,780 मीटर तक की लम्बाई, सिर्फ 07 मीटर चौड़ा है। यही हिस्सा गोरखपुर बाईपास एनएच 27 पर खुलता है। इस हिस्से को चौड़ा करने के लिए 12 करोड़ रुपये निगम को मिले हैं। नगर निगम अब इस धनराशि से एक्सेलेरेशन एवं डी-एक्सेलेरेशन लेन का निर्माण करेगा।

क्या होती हैं एक्सेलेरेशन एवं डी-एक्सेलेरेशन लेन
जब कोई वाहन किसी लिंक रोड, सर्विस रोड या जंक्शन से राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रवेश करता है, तो उसे हाईवे पर चल रहे तेज रफ्तार वाहनों की गति तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी की आवश्यकता होती है। इसी अतिरिक्त पट्टी को एक्सेलेरेशन लेन कहते हैं।

इसी तरह जब कोई वाहन हाईवे से उतरकर किसी गांव, शहर, सर्विस रोड या जंक्शन की ओर मुड़ता है, तो उसे अपनी गति कम करनी पड़ती है। यदि वह मुख्य लेन में ही अचानक ब्रेक लगाएगा तो पीछे से आने वाले वाहनों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाएगा। इसलिए हाईवे से अलग एक अतिरिक्त लेन बनाई जाती है, जहां वाहन पहले गति कम करता है और फिर सुरक्षित रूप से बाहर निकलता है, इसे डी-एक्सेलेरेशन लेन कहते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इन लेनों के निर्माण से दुर्घटनाओं की संभावना कम होती है और हाईवे पर यातायात का प्रवाह भी सुचारु बना रहता है।