History Of Nichlaul :महराजगंज के निचलौल में आज भी जिंदा है राजा रत्नसेन की विरासत, जानिए इतिहास की अनसुनी कहानी

    02-Jun-2026
Total Views |

History Of Nichlaul :
यूपी के आखिरी छोर पर बसा जिला है महराजगंज। यह जिला अपनी भौगोलिक स्थिति के साथ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और लोककथाओं की वजह से भी जाना जाता है।

जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बहुत से ऐतिहासिक स्थल मौजूद हैं, जो अपने अंदर अनगिनत अध्याय समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक है निचलौल क्षेत्र, जो कभी राजा रत्नसेन के प्रभावशाली शासन का केंद्र माना जाता था।

एक समय ऐसा था जब इस क्षेत्र में कभी राजा रत्नसेन का शासन हुआ करता था जिनका जिक्र हमें लोककथाओं और इतिहास में मिलता है। उस समय में जिले निचलौल क्षेत्र में राजा रत्नसेन का एक प्रभावशाली विरासत और मजबूत शासन था। आज भले ही राजा रत्नसेन के महल और किले के अवशेष दिखाई नहीं देते, लेकिन उनसे जुड़ी कहानियां और कई ऐतिहासिक स्थल अब भी स्थानीय लोगों की स्मृतियों में जीवित हैं। यही वजह है कि निचलौल का नाम आज भी इतिहास और लोकविश्वास के साथ जुड़ा हुआ है।

महराजगंज जिले के राजेंद्र प्रसाद ताराचंद महाविद्यालय के इतिहास के एक प्रोफेसर का कहना है कि निचलौल क्षेत्र पहले पालपा स्टेट से जुड़ा हुआ था और इस क्षेत्र को तिलपुर परगना के नाम भी जाना जाता है।

पालपा स्टेट से जुड़ा था तिलपुर परगना
इतिहास के अनुसार, तत्कालीन समय में जब नेपाल नरेश ने पालपा स्टेट पर आक्रमण किया तो उस समय के वहाँ के तत्कालीन शासक को बंदी बना लिया गया और इसके बाद उनकी हत्या भी कर दी गयी। इसके बाद राजा रत्नसेन के वंशज आकर तिलपुर परगना क्षेत्र में बस गए। माना जाता है कि इनका संबंध राजस्थान के प्रसिद्द राजा रत्नसेन के वंश से था।

1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ उठाई आवाज
वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यहां के शासक राजा रंडोल सेन, जिन्हें स्थानीय परंपराओं में राजा रत्नसेन के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उनके इस विरोध में यहां के स्थानीय जमींदारों ने भी उनका साथ दिया। उनके विरोध करने के कारण बाद में अंग्रेजों ने उनके किले को ध्वस्त कर दिया। इसके बाद यहाँ के राजा को यह क्षेत्र छोड़ना पड़ा लेकिन उनकी वीरता और संघर्ष की कहानियां आज भी लोगों को सुनाई जाती हैं।

चौरधोईया नाला से जुडी है अनोखी मान्यता
निचलौल क्षेत्र में आज भी कई स्थान ऐसे हैं जिन्हे राजा रत्नसेन के शासनकाल से जोड़कर देखा जाता है। इनमे एक बहुत ही लोकप्रिय जगह है चौरधोईया नाला, जिसके बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां पर राजा रत्नसेन के सेना में कार्यरत लोगों के भोजन बनाने के लिए चावल को इसी में धोया जाता था। यह स्थान आज भी लोगों के बीच ऐतिहासिक महत्त्व रखता है।

कोट मोहल्ला भी सुनाता है पुराने शासन की कहानी
निचलौल कस्बे का कोट मोहल्ला भी इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहीं राजा का दरबार या कोर्ट लगा करता था, जहां प्रशासनिक और न्यायिक कार्य संपन्न होते थे।

महराजगंज का निचलौल केवल एक क़स्बा नहीं बल्कि इतिहास, लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण है। यहां मौजूद कहानियां और ऐतिहासिक संदर्भ आने वाली पीढ़ियों को अतीत से जोड़ने का काम कर रहे हैं। राजा रत्नसेन की विरासत आज भी इस क्षेत्र की पहचान का अहम् हिस्सा हैं।