लक्ष्मीपुर। गर्भवती महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित प्रसव की सुविधा देने के उद्देश्य से शुरू की गई सीएचसी लक्ष्मीपुर की सिजेरियन सेवा महज 45 दिनों में ही ठप पड़ गई। सेवा बंद होने के बाद अब प्रतिदिन एक से दो गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन प्रसव के लिए नौतनवा, महराजगंज अथवा निजी अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, मध्य अप्रैल में सीएचसी लक्ष्मीपुर में सीएचसी बनकटी से डॉ. कविता अग्रवाल व सीएचसी निचलौल से डॉ. सत्यप्रकाश प्रजापति की सप्ताह में तीन दिन (सोमवार, बुधवार व शुक्रवार) के लिए बतौर विशेषज्ञ चिकित्सक (सर्जन) के रूप में तैनाती हुई थी। मई के आखिरी सप्ताह तक को इस अस्पताल में हर सप्ताह चार से पांच गर्भवती महिलाओं का ऑपरेशन के जरिए सुरक्षित प्रसव कराया गया।
लेकिन जून के पहले सप्ताह से यहां पर सिजेरियन सुविधा पूरी तरह से बंद है। बताया जाता है कि प्रतिनियुक्त चिकित्सक तय दिन में सिजेरियन के लिए आते ही नहीं हैं। दूसरी तरफ सीएचसी लक्ष्मीपुर के अधीक्षक डॉ. अरुण गुप्ता नर्स की कमी के कारण सिजेरियन सेवा बंद होने की बात स्वीकार कर रहे हैं। आज की तारीख में आलम ये है कि हर रोज यहां पर एक से दो गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन की सुविधा न होने की दशा में रेफर होना पड़ रहा है। इसकी वजह से महिलाओं को आर्थिक परेशानी तो झेलनी पड़ ही रही है। साथ में असुविधा भी हो रही है।
वहीं सिजेरियन न होने के पीछे की एक और वजह एनेस्थेटिक की कमी को बताया जा रहा है। ललाइन पेसिया निवासी उज़्मा सिद्दीकी ने बताया कि उनकी रिश्तेदार को प्रसव के लिए सीएचसी लक्ष्मीपुर ले जाया गया था। लेकिन सिजेरियन की सुविधा न होने के कारण निजी अस्पताल में जाकर सिजेरियन कराना पड़ा।
वहीं पिपरा परसौनी निवासी अनीता डबगरवाल ने कहा कि उनके प्रसव का समय आ चुका है। लेकिन यहां पर सिजेरियन सेवा न होने के कारण लगता है कि प्रसव के लिए निजी अस्पताल ही जाना पड़ेगा।
वहीं इस बाबत सीएचसी अधीक्षक डॉ. अरुण गुप्ता ने स्वीकार किया कि स्टाफ नर्स, एनेस्थेटिक और नियमित स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी के कारण सिजेरियन सेवा बाधित हो रही है।
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