महराजगंज। सहालग शुरू होते ही शहर के बाजार में मौर, सिंहोरा, पगड़ी की बिक्री बढ़ गई है। वैवाहिक कार्यक्रम में पहले दूल्हे के सिर पर मालियों के हाथों से बने सेहरे और मउर का प्रयोग होता था। लेकिन जैसे-जैसे लोगों पर आधुनिकता सवार हुई वैसे-वैसे मउर भी अपना स्वरूप बदलने लगा। अब आकर्षक मउर, पगड़ी और टोपी प्रचलन में आ गई है।
शादियों का शुभ मुहूर्त चल रहा है। ऐसे में दूल्हे के लिए सेहरा, मुकुट और मउर की जरूरत पड़ेगी जिससे वह पारंपरिक ढंग से रस्मों को निभा सके। बाजार में जगह-जगह पगड़ी और टोपी की दुकानें सजीं हैं, जिस पर दिनभर ग्राहकों की भीड़ लगी रह रही है।
दुकानदार शिव पटवा ने बताया कि बताया कि पहले मउर की अच्छी बिक्री होती थी। अब मउर के साथ-साथ पगड़ी एवं टोपी की मांग हो रही है। बताया कि दूल्हे की टोपी 400 से लेकर चार हजार तक बिक रही है। सिंहोरा 300 से लेकर 1100 तक, माला 200 से लेकर एक हजार तक, मउर 400 से लेकर एक हजार तक व सिंदूर 251 रुपये पैकेट बिक्री हो रही है।
शादियों में बनारसी पगड़ी एवं सिंहोरा की मांग ज्यादा रहती है। पहले ही सामान मंगा लिया है। बुधवार को को भी पूरे दिन बाजार गुलजार रहे। शादी-विवाह के सामानों के दुकानों पर लोग सामान की खरीदारी करते दिखे।
दुकानदारों का कहना है कि बनारस और पटना से दूल्हा-दुल्हन को सजाने वाली सामग्रियां मंगाते हैं। स्थानीय स्तर पर सजाने का काम भी किया जा रहा है। हाथ से बने सिंहोरा की मांग सबसे अधिक है। ऐसे ही दूल्हे की पगड़ी पर सजावट और कारीगरी का काम स्थानीय स्तर पर किया जाता है।