महराजगंज। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए नीति आयोग की दो सदस्यीय टीम ने सोमवार को जिला अस्पताल में इलाज व्यवस्था की गहन जांच की। न्यू सिक बार्न केयर यूनिट से लेकर लेबर रूम में प्रसव, जच्चा-बच्चा की देखभाल और इलाज उपकरण की जांच की।
मरीजों से इलाज सुविधा के बारे में जानकारी ली। इसके बाद टीम ने निचलौल सीएचसी का निरीक्षण किया। विशेष नीति आयोग स्टेट सपोर्ट मिशन के धीरेंद्र पांडेय के नेतृत्व में टीम नौ बजे जिला अस्पताल पहुंची। सबसे पहले टीम सीएमएस कक्ष में मीटिंग की। इसके बाद टीम रैन बसेरा पहुंची। रैन बसेरा में ठंड से बचाव के लिए लगे संसाधनों को देखा मरीजों से कंबल के बारे में जानकारी ली।
इतना ही नही तीमारदारों से जच्चा की देखभाल के बारे में पुछताछ की। यहां से टीम न्यू सिक बार्न केयर यूनिट(एसएनसीयू) में पहुंची। बीमार नवजातों को इलाज देने के लिए लगे उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की। टीम ने डॉक्टर और पैरामेडिक कर्मचारियों से उपकरण को चलाने व नवजातों को इससे इलाज देने के बारे में पूछताछ की।
जिला महिला अस्पताल और निजी हास्पिटलों व सीएचसी पर जन्मे नवजातों के बीमारियों के बारे में वार्ड इंचार्ज से व नोडल से जानकारी लिया। यहां से टीम महिला अस्पताल के ओपीडी में पहुंची। डॉक्टरों से महिलाओं की बीमारियों और दवा के बारे में पुछताछ की। यहां से टीम लेबर रूम में पहुंची। प्रसव कराने के लिए लगे उपकरण और उसकी गुणवत्ता की जांच की। वहां पर भर्ती प्रसूताओं से नास्ता, भोजन के बारे में पूछताछ की। इस मौके पर सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी, एसीएमओ आरसीएच डॉ. राजेश द्विवेदी, डॉ. एवी त्रिपाठी, डॉ. अंबर इस्लाम हक सहित कई डॉक्टर और पैरामेडिकल कर्मचारी मौजूद रहे।
टीम ने एफआरयू सेंटर सीएचसी का लिया जायजा नीति आयोग की टीम जिला अस्पताल के बाद एफआरयू सेंटर सीएचसी निचलौल, फरेंदा और लक्ष्मीपुर में गर्भवती महिलाओं की इलाज, सामान्य प्रसव और ऑपरेशन से प्रसव के उपकरण की जांच की।
इससे पहले टीम ने एफआरयू सेंटर सीएचसी परतावल में गर्भवती महिलाओं की इलाज, जांच, और ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा और इलाज की व्यवस्था की जांच की थी।