Maharajganj News : हरे भरे सुनियोजित अपराध की कहानी ! महराजगंज के जंगलों में लकड़ियों की अंधाधुंध तस्करी

31 Jan 2026 13:35:05

महराजगंज। वन विभाग की गश्त और दावों के बावजूद महराजगंज के जंगलों में लकड़ी की तस्करी बेलगाम हो चुकी हैं। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के जंगलों में साखू, सागौन और धूप जैसे कीमती पेड़ों की अंधाधुंध कटान जारी है। हालात ऐसे हैं कि तस्कर जंगल से लकड़ी काटकर उसे फर्नीचर का रूप दे रहे हैं और फिर बेखौफ महानगरों तक सप्लाई कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं।

342 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र से घिरा महराजगंज जनपद लकड़ी माफियाओं के लिए मुफीद इलाका बनता जा रहा है। यही वन क्षेत्र नेपाल के चितवन नेशनल पार्क और बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व को जोड़ने वाले अंतरराष्ट्रीय वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर का हिस्सा है। बावजूद इसके, न वन संपदा सुरक्षित है और न ही पर्यावरण।

सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग की मधवलिया, पकड़ी, चौक और लक्ष्मीपुर रेंज के जंगलों में तस्कर लगातार हरे-भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ी और आरा मशीन चला रहे हैं। वन विभाग की छापेमारी के बाद भी कटान रुकने का नाम नहीं ले रही। साफ है कि या तो तस्करों को अंदरूनी सूचना मिल रही है या फिर कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है।

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सबूत मिटाने की साजिश :

लकड़ी के अवैध कारोबार से जुड़े एक व्यक्ति ने बातचीत में चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि पेड़ काटने के बाद तस्कर उसकी जड़ (बूट) को मिट्टी और खरपतवार से ढक देते हैं, ताकि वन विभाग को कटान के निशान न दिखें। एक ही जगह पेड़ न काटकर अलग-अलग दूरी पर कटान की जाती है, जिससे जंगल में बड़ी क्षति तुरंत पकड़ में न आए। यह सुनियोजित अपराध है, जो विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


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