
मुख्य दोषी को दुष्कर्म के मामले में 10 साल की सजा
अदालत ने मामले में मुख्य दोषी धर्मेंद्र यादव को दुष्कर्म के आरोप में 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अपहरण और आपराधिक साजिश से संबंधित मामले में भी उसे पांच साल के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
वहीं, गामा यादव और गायत्री देवी को पांच-पांच साल के कारावास तथा 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में दोषियों को अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
शादी का झांसा देकर ले जाने का था आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घुघली थाना क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि 10 मार्च 2015 को उनकी 17 वर्षीय बेटी सिलाई-कढ़ाई सीखने के लिए प्रशिक्षण केंद्र जा रही थी। आरोप था कि पट्टीदारी की रंजिश के चलते साजिश रचकर शादी का झांसा दिया गया और किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। मामले में पुलिस अधीक्षक के आदेश पर आठ मई 2015 को घुघली थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की विवेचना की और जांच पूरी कर अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। इसके बाद मामले की सुनवाई अपर सेशन न्यायाधीश की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने साक्ष्य और गवाह प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तीनों आरोपितों को दोषी करार दिया।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता सर्वेश्वर मणि त्रिपाठी ने पैरवी की। अदालत ने 14 अक्टूबर को तीनों को दोषसिद्ध करार देते हुए सजा सुनाई। करीब नौ साल पुराने इस मामले में अदालत के फैसले के बाद कानूनी कार्रवाई पूरी की गई।