
महराजगंज। खेती में रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल कम करने और किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन और पशुपालन विभाग ने नई पहल की है। इसके तहत गोसदन मधवलिया में जमा होने वाले गोमूत्र से फसलों के लिए प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किया जाएगा। तैयार उत्पाद को बोतलों में पैक करके किसानों को उपलब्ध कराने की योजना है।
इस पहल से किसानों को खेती के लिए एक प्राकृतिक विकल्प मिल सकेगा। साथ ही गोसदन में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करके उसकी आमदनी बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। फसलों को कीटों से बचाने के लिए किसान अक्सर रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। इनके गलत या असुरक्षित इस्तेमाल से मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ सकता है। ऐसे में जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।
इसी दिशा में गोसदन मधवलिया में गोमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार करने की योजना बनाई गई है। इसका उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित खेती के विकल्पों के बारे में जागरूक करना भी है। योजना के तहत गोसदन में गोमूत्र इकट्ठा करने, उसे तैयार करने और सुरक्षित तरीके से रखने की व्यवस्था की जा रही है। उत्पाद की गुणवत्ता की जांच के बाद ही इसे किसानों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके लिए गोमूत्र से तैयार कीटनाशक की बोतलें तैयार की जाएंगी। किसान जरूरत के अनुसार इसे खरीद सकेंगे। हालांकि, इसकी कीमत और बिक्री शुरू होने की तारीख के बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है। इस पहल से गोसदन में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। गोमूत्र से प्राकृतिक कीटनाशक तैयार कर बेचने से गोसदन के लिए आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया भी बन सकता है। इससे प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ गोसदन की व्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एजाज अहमद ने बताया कि जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और गोसदन के संसाधनों का सही इस्तेमाल करने के लिए यह पहल की जा रही है। गोसदन में एकत्र होने वाले गोमूत्र से फसलों के लिए कीटनाशक तैयार किया जाएगा और इसे किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि जल्द ही इसकी बोतलों में पैकिंग का काम शुरू होगा।