Maharajganj News : जंगल के बीच छिपा एक चमत्कार, जहाँ मिलते हैं आस्था और इतिहास
12-Feb-2026
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महराजगंज। जिले के सदर ब्लॉक के ग्राम सभा कटहरा में स्थित प्राचीन शिव मंदिर आज श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। कभी खंडहर के रूप में जाना जाने वाला यह स्थल अब दूर-दराज से आने वाले भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करने लगा है।
वर्ष 1948 में जब इसक्षेत्र में लोगों ने बसना शुरू किया, तब धीरे धीरे यह स्थल धीरे-धीरे श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान बन गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर बौद्धकालीन है। ऐसी जनश्रुति है कि गौतम बुद्ध की माता महामाया गर्भावस्था के दौरान लुंबिनी (नेपाल) जाते समय इसी मार्ग से गुजरी थीं।
एक समय यह इलाका घने जंगलों से घिरा था। क्षेत्र के जमींदार अफजल खान ने लोगों से यहां बसने की अपील की थी, लेकिन हिंसक जानवरों के भय से कोई तैयार नहीं हुआ। बाद में लोगों ने जंगल काटकर भूमि को कृषि योग्य बनाया और गांव बस गया। मंदिर के उत्तर दिशा में तीन विशाल पोखरे आज भी मौजूद हैं, जिनके बारे में कहा जाता है कि रानियां इनमें स्नान करने आती थीं।
किवदंती यह भी है कि मंदिर के पास राजा का दरबार था और वहां से शिव मंदिर तक एक गुप्त सुरंग बनी थी, जिसका उपयोग राजा-रानी पूजा-अर्चना के लिए करते थे। समय के साथ मंदिर की ख्याति बढ़ती गई और लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होने लगीं, जिससे इसकी लोकप्रियता में वृद्धि हुई।
वर्ष 1950 में कुशीनगर के सेमरहिया निवासी बाबा कमलदास यहां आकर रहने लगे, जिससे मंदिर की पहचान और महत्ता और मजबूत हुई । श्रावण मास और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला लगता है।
इस मेले में गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, बिहार और नेपाल सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मेला समिति के अनुसार, श्रद्धालुओं के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।