Maharajganj News : लोकार्पण को चार साल... फिर भी सूखी उम्मीदें! आखिर क्यों किसानों के किसी काम की नहीं है ये परियोजना
16-Feb-2026
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महराजगंज। महराजगंज में सिंचाई को सुदृढ़ करने के बड़े दावों के बावजूद जमीनी हालात किसानों को राहत नहीं दे पा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब चार साल पहले जब सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण किया था, तब दावा किया गया था कि किसानों को सिंचाई में सहूलियत मिलेगी लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।
नहर में पर्याप्त और नियमित पानी न आने से किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए पंपिंग सेट और पाइप का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खेती में उनकी लागत बढ़ रही है।
सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण 11 दिसंबर 2021 को हुआ था। परियोजना का उद्देश्य पूर्वांचल के कई जिलों में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करना था। आधिकारिक दावों के अनुसार इससे लाखों हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जाना है। लेकिन महराजगंज जिले के नौतनवा, लक्ष्मीपुर और फरेंदा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि नहर में पानी तो आता है, पर प्रवाह क्षमता इतनी कम रहती है कि खेतों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता।
गेहूं की बुआई के समय भी कई किसानों को पानी की कमी से जूझना पड़ा, जिन क्षेत्रों में नहर का प्रवाह कमजोर है, वहां पाइप डालकर खेतों तक पानी खींचना पड़ता है। इससे डीजल और बिजली पर खर्च बढ़ता है, जो पहले ही बढ़ती कृषि लागत से जूझ रहे किसानों पर अतिरिक्त बोझ है।
परियोजना को प्रदेश की सबसे बड़ी सिंचाई योजनाओं में गिना जाता है। इस परियोजना के तहत घाघरा, राप्ती, बाणगंगा, सरयू और रोहिणी नदियों को जोड़ने की बात कही गई है, ताकि सिंचाई क्षमता बढ़ाई जा सके। दावों में जहां लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित होने की बात है, वहीं महराजगंज जिले के कई गांव-हरपुर, लीलाछापर, लेजार महादेवा, फरेंदा बुजुर्ग, बाजारडीह, बनकटी, मथुरा नगर, पिपराखल्ली, सेमरा महराज, सिसवनिया, लेहड़ा आदि के किसान अब भी नियमित और पर्याप्त पानी की प्रतीक्षा में हैं।