Creative Teaching : जहाँ 'कबाड़' बन गया 'किताब'! शिक्षक ने बना दिए बच्चों के लिए अनोखे लर्निंग टूल
10-Apr-2026
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शिवानी श्रीवास्तव
महराजगंज। जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित निचलौल के पतौना गांव का एक सरकारी स्कूल इस समय अपनी अनोखी शिक्षा पद्धति को लेकर चर्चा में है। यहाँ के एक शिक्षक सर्वदानंद ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी क्रिएटिविटी से एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जो बच्चों की पढ़ाई को आसान और रोचक बना रहा है।
सर्वदानंद ने घरों में पड़े बेकार सामानों, यानी कूड़े में जाने वाली चीजों से अलग-अलग लर्निंग टूल बनाये हैं। इन लर्निंग टूल्स से पढ़ाई को आसान बनाया जा सकता है। इन टूल्स से छोटे बच्चे खेल-खेल में कठिन विषयों को भी आसानी से समझ पा रहे हैं। बोरिंग तरीके से पढ़ने की जगह पढ़ाई को इंटरेस्टिंग बनाने और उसे व्यावहारिक रूप से समझाने की दिशा में ये एक बहुत ही अच्छी पहल है।
पढाई में क्रिएटिविटी का नया मॉडल सर्वदानंद ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया कि ज्यादातर लर्निंग टूल बिना किसी खर्च के तैयार किए गए हैं, जबकि कुछ बेहद कम लागत में बने हैं। लर्निंग टूल के माध्यम से बच्चे खेलते खेलते और मनोरंजक तरीके से भी अलग-अलग विषयों की बारीकियां को समझ पाते हैं। इन टूल्स के जरिए बच्चे न सिर्फ पढ़ाई में रुचि ले रहे हैं, बल्कि विषयों की बारीकियों को भी व्यावहारिक रूप से समझ रहे हैं।
यह पहल ये दर्शाती है कि अगर शिक्षक क्रिएटिव हो तो कम संसाधनों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकती है।
सर्वदानंद ने अलग-अलग विषयों के लिए अलग-अलग तरीके के लर्निंग टूल्स बनाये है। हिंदी को सिखाने के लिए कागज के गत्तों से बना एक लर्निंग टूल है, जिससे छोटे बच्चे हिंदी भाषा के एक एक अक्षर को समझते हैं। वहीँ गणित को आसान बनाने के लिए उन्होंने एक खास इलेक्ट्रॉनिक लर्निंग टूल विकसित किया है, जिसमें कई स्विच लगे हैं। इन स्विचों को दबाकर बच्चे कैलकुलेशन करते हैं और खेल-खेल में मैथ के कॉन्सेप्ट समझते हैं।
यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए पढ़ाई को मजेदार बना रही है बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत भी दे रही है।