Maharajganj Dacoit Story : रातभर पहरा देते थे ग्रामीण, महराजगंज में कभी ऐसा था डाकुओं का खौफ
11-May-2026
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Maharajganj Dacoit Story : महराजगंज जिला अपनी प्राकृतिक ख़ूबसूरती और जंगलों के लिए जाना जाता है लेकिन कभी यही जंगल डाकुओं के खौफ का गढ़ हुआ करते थे। नेपाल की सीमा से सटे इस जिले का एक विशाल हिस्सा घने जंगलों से ढका है, जहां बड़ी आबादी निवास करती है।
चौक और निचलौल इलाके में आजादी के बाद से लेकर 90 के दशक तक डाकुओं का आतंक इस कदर था कि लोग शाम ढलते ही घरों में कैद हो जाते थे। ये क्षेत्र विशेष रूप से इन गिरोहों के सुरक्षित ठिकाने माने जाते थे।
इतिहास के इन खौफनाक किस्सों को आज भी बुजुर्ग याद करते हैं। हालांकि, आज के समय में स्थिति सामान्य हो गई है।
निचलौल के राजेंद्र प्रसाद ताराचंद महाविद्यालय के इतिहास प्रवक्ता डॉ. बृजेश पांडे ने बताया कि चौक क्षेत्र का रहने वाला अलगू यादव कभी साधारण भैंस चराने वाला युवक था, लेकिन परिस्थितियों और पुलिस दबाव के चलते वह जंगलों में चला गया और धीरे-धीरे उसने अपना डाकू गिरोह खड़ा कर लिया।
बताया जाता है कि अलगू यादव के गिरोह का सदस्य संतराज बाद में खुद एक बड़ा डाकू सरदार बन गया। फरेंदा से लेकर चौक तक के इलाकों में लोग उसके नाम से सहम जाते थे। संतराज के अलावा झिनक डाकू का भी इस क्षेत्र में बड़ा प्रभाव थ। इन डाकुओं की दहशत का आलम यह था कि ग्रामीण अपनी जान-माल की रक्षा के लिए रातों को पहरा देने पर मजबूर थे।
आश्चर्य की बात यह है कि इन डाकुओं के बीच भी अपने-अपने 'इलाकों' का स्पष्ट बंटवारा था। जहां एक ओर चौक क्षेत्र में संतराज का बोलबाला था, वहीं नेपाल सीमा से सटे निचलौल क्षेत्र में नेपाल के 'अलाउद्दीन डाकू' का आतंक था। डॉ. बृजेश पांडे बताते हैं कि कई बार इन गिरोहों के बीच आपसी मुठभेड़ भी हो जाती थी। यदि कोई एक गिरोह दूसरे के निर्धारित क्षेत्र में डकैती डालने की कोशिश करता, तो उनके बीच खूनी रंजिश शुरू हो जाती थी। वर्चस्व की यह लड़ाई जंगलों में अक्सर गोलियों की गूंज बनकर गूंजती थी।
हालांकि समय के साथ पुलिस कार्रवाई और बदलते हालातों ने इन गिरोहों का खात्मा कर दिया, लेकिन महराजगंज के जंगलों में डाकुओं के खौफ की कहानियां आज भी लोगों की जुबान पर जिंदा हैं।