Maharajganj News : CM के ड्रीम प्रोजेक्ट का बुरा हाल! 3 साल बाद भी नहीं बनी 6.5 किमी सड़क

    14-Jul-2026
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लक्ष्मीपुर।
राज्य सड़क निधि योजना के तहत वनग्रामों को मुख्य सड़क से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किया गया सड़क निर्माण कार्य तीन वर्ष बाद भी अधूरा पड़ा है। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल इस योजना के तहत लक्ष्मीपुर रेंज के राजस्व वनग्राम कानपुर दर्रा को पीडब्ल्यूडी मार्ग से जोड़ने के लिए 6.5 किलोमीटर इंटरलॉकिंग सड़क बनाई जानी थी, लेकिन अब तक केवल आंशिक कार्य ही पूरा हो सका है।

488.19 लाख रुपये लागत की इस सड़क के तीन किलोमीटर हिस्से में केवल गिट्टियां बिछाकर काम छोड़ दिया गया है। इससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिलान्यास पट्टिका के अनुसार, इस सड़क का शिलान्यास नौ अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा किया गया। परियोजना की कार्यदायी संस्था वन विभाग महराजगंज है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़े-बड़े दावों के साथ शुरू हुई यह योजना अब लापरवाही की भेंट चढ़ गई है।


जानकारी के अनुसार, इस सड़क का उद्देश्य जंगलों में बसे वनग्राम कानपुर दर्रा और बेलौहा दर्रा के लोगों को मुख्य मार्ग से जोड़ना था ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित हो सके। शुरुआती चरण में चानकी घाट से गंगापुर तक इंटरलॉकिंग का कार्य पूरा कर दिया गया लेकिन गंगापुर से जंगल गुलहरिया तक लगभग तीन किलोमीटर मार्ग अधूरा छोड़ दिया गया। 

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क पर बिखरी गिट्टियों के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। गर्मी में उड़ती धूल लोगों को परेशान करती है जबकि बरसात में यही मार्ग दलदल और फिसलन में बदल जाता है। दोपहिया वाहन अक्सर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं और कई बार एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पातीं। इससे मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को समय पर उपचार मिलना कठिन हो जाता है।

स्कूली बच्चों, किसानों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत के बावजूद केवल आश्वासन मिला है।

ग्राम प्रधान कुसमावती ने बताया कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों को कई बार पत्र भेजकर सड़क निर्माण शीघ्र पूरा कराने की मांग की गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने को मजबूर होंगे।