महराजगंज। सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग इन दिनों अपनी जैव विविधता के साथ-साथ एक अनोखी जंगली सब्जी 'भुटकी-सफड़ा' को लेकर चर्चा में है। स्वाद और पोषण से भरपूर यह दुर्लभ सब्जी बाजार में ₹1500 प्रति किलो तक बिक रही है, जो कीमत के मामले में मटन को भी पीछे छोड़ चुकी है।
करीब 482.2 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में बारिश के मौसम में नम जमीन पर यह जंगली सब्जी स्वतः उगती है। पूरे सीजन में इसका उत्पादन महज एक से डेढ़ क्विंटल तक ही होता है। सीमित उपलब्धता के कारण इसकी मांग लगातार बनी रहती है। महराजगंज के अलावा गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, संतकबीरनगर और सिद्धार्थनगर के लोग भी इसे बड़े चाव से खरीदते और खाते हैं। जंगल से बाजार तक का सफर आसान नहीं लक्ष्मीपुर वन रेंज क्षेत्र के अशोक चौधरी ने बताया कि भुटकी-सफड़ा केवल जुलाई और अगस्त के दौरान ही प्राकृतिक रूप से उगती है। जंगल के आसपास के गांव वाले जो बकरी चराने या घास इत्यादि के लिए जंगल जाते वह इस सब्जी को निकालकर स्थानीय बाजार में बेचते हैं। निरनाम पूर्वी ग्राम पंचायत के निवासी सलीम ने बताया कि जंगल में दो से तीन घंटे की मेहनत के बीच 50 ग्राम या 100 ग्राम की मात्रा में ही वे भुटकी सफड़ा निकाल पाते हैं। क्योंकि ये बहुत सीमित दायरे में उगता है और इसे निकालने में बहुत मेहनत लगता है।
स्वाद के साथ सेहत का खजाना जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि यह जंगल की आग से बनने वाली राख में उगती है। इसका ऊपरी रंग काला होता है लेकिन जैसे ही इसे पानी से धुलते हैं यह सफ़ेद दिखने लगती। यह जंगल में प्राकृतिक तरीके से उगती है। इसे एक तरह का मशरूम कह सकते हैं। इसमें प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होता है। यह स्वाद और पोषण से भरपूर माना जाता है।
शिवानी श्रीवास्तव (Shivani Srivastava) 'आपन महराजगंज' में सहायक संपादक (Assistant Editor) के पद पर कार्यरत हैं। यह संपादकीय कार्यों, समाचारों के संपादन और पोर्टल की कंटेंट टीम में अपनी भूमिका निभाती हैं।