पनियरा। महराजगंज के पनियरा नगर पंचायत में गुरुवार शाम गरीबी और स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूरी का दर्दनाक दृश्यदेखने को मिला। गंभीर रूप से बीमार बेटे को अस्पताल पहुंचाने के लिए बुजुर्ग पिता के पास न एंबुलेंस बुलाने का साधन था और न कोई दूसरा वाहन मिल सका। आखिरकार मजबूर पिता ने बेटे को ठेले पर लिटाया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पनियरा की ओर निकल पड़े। पीछे उसकी पत्नी दो साल के बच्चे को गोद में लेकर पैदल अस्पताल पहुंची। यह दृश्य देखकर आसपास के लोगों में भी चर्चा शुरू हो गई।
बता दें कि वार्ड नंबर-5 कबीर नगर निवासी महाजन पुत्र सरजू भारती ठेला चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। गुरुवार शाम करीब पांच बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। पिता सरजू भारती पढ़े-लिखे नहीं हैं और मोबाइल से एंबुलेंस बुलाने में असमर्थ थे। कोई दूसरा साधन नहीं मिलने पर उन्होंने बेटे को ठेले पर लिटाया और अस्पताल लेकर चल पड़े।
इस दौरान महाजन की पत्नी ललिता अपने दो साल के बेटे को गोद में लेकर पीछे-पीछे पैदल चलकर अस्पताल पहुंचीं। सड़क पर ठेले पर बीमार युवक को ले जाते बुजुर्ग पिता और पीछे बच्चे को गोद में लिए उसकी पत्नी का दृश्य देखकर आसपास के लोग भी भावुक हो गए।
पत्नी ललिता ने बताया कि महाजन पिछले करीब चार महीने से पैर की गंभीर बीमारी से परेशान थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनका बेहतर इलाज नहीं हो पा रहा था। गुरुवार को भी वह किसी तरह ठेला लेकर कस्बे गए थे। वहां से लौटने के बाद अचानक उनकी तबीयत ज़्यादा बिगड़ गई।
महाजन की कमाई ही परिवार की आय का मुख्य जरिया थी। बीमारी के कारण काम प्रभावित होने से परिवार पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इलाज के लिए उनकी पत्नी ने समूह से कर्ज भी लिया था।
PHC पनियरा के चिकित्सा अधिकारी डॉ. श्रवण कुमार तिवारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में खेतों में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक के सेवन की आशंका सामने आई थी। युवक के मुंह से झाग निकल रहा था और उसकी हालत गंभीर थी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया।
परिजन एंबुलेंस से महाजन को गोरखपुर लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। देर रात शव को घर लाया गया।
महाजन अपने पीछे पत्नी ललिता और दो बच्चों को छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी बेटी करीब 12 वर्ष की है, जबकि छोटा बेटा महज दो साल का है। पिता सरजू भारती ने बताया कि उनकी पांच बेटियां और एक बेटा था। सभी बेटियों की शादी हो चुकी है।
परिवार के पास अपनी जमीन भी नहीं है। परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है। महाजन की पत्नी ने इलाज के लिए समूह से कर्ज भी लिया था, लेकिन पति को बचाया नहीं जा सका।
यह घटना गरीब परिवारों के सामने आपात स्थिति में समय पर स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंचने की चुनौती को भी उजागर करती है। बुजुर्ग पिता का बीमार बेटे को ठेले पर अस्पताल ले जाने का दृश्य व्यवस्था और जागरूकता, दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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