Maharajganj News : सदियों पुरानी जरीब खत्म! अब 'डिजिटल नजर' से नापी जाएगी जमीन, बदलेगा पूरा सिस्टम

    20-Apr-2026
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महराजगंज।
मंडल में भूमापन की पारंपरिक व्यवस्था अब बदलने जा रही है। सदियों से चली आ रही जरीब (चेन कड़ी) से जमीन की नापजोख की प्रक्रिया को अब डिजिटल तकनीक से बदल दिया जाएगा। भूमि की नापजोख अब कैटालिस्ट डीएटू रोवर्स नाम के डिजिटल उपकरण से होगी। सदर तहसीलदार पंकज शाही ने बताया कि सदर तहसील के लिए यह उपकरण मिल चुके हैं जिनका प्रशिक्षण शीघ्र ही निर्धारित करते हुए राजस्व कर्मियों को दिया जाएगा।

जनपद में प्रभावी राजस्व महकमे के भूमापन की तरीका अकबर के शासन काल का बताया जाता। मुख्यालय निवासी भूमि नापजोख के जानकर गोविंद वर्मा ने बताया कि मुगलकाल में अकबर के समय जरीब व चेन आधारित नापजोख की प्रक्रिया राजा टोडरमल ने शुरू कराई थी। वह अकबर के दीवान हुआ करते थे।

मौजूदा समय में उसी समय की यह विधि भूमापन में प्रयुक्त हो रही थी। लेकिन अब इसका स्थान पारदर्शी व डिजिटल व एआई ( आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) लैस उपकरण से किया जाएगा जो काफी सटीक और पारदर्शी होगी। राजस्व विभाग की इस नई पहल का उद्देश्य खेतों की नापजोख में सौ फीसदी सटीकता लाना और भूमि विवादों को कम करना है।


नई भूमापन तकनीकी से राजस्व कार्यों को पूरी तरह डिजिटल व पारदर्शी होगा। हालांकि ड्रोन व उपग्रह आधारित नाप की व्यवस्था नगर निकाय में प्रयुक्त होने लगी थी, लेकिन राजस्व महकमा पहली बार आधिकारिक रूप से इस नई व्यवस्था को आत्मसात करने जा रहा। इससे जमीन की वास्तविक स्थिति का आकलन रीयल टाइम में संभव होगा।

किसानों को बदली व्यवस्था से सीधा लाभ
एडीएम डाॅ. प्रशांत कुमार ने बताया कि जीएनएसएस तकनीक के माध्यम से जमीन की लोकेशन और सीमाओं का निर्धारण बेहद सटीकता से होगा। खेत और प्लॉट की पैमाइश, सीमांकन, राजस्व अभिलेख मिलान इत्यादि में तेजी आएगी। इसका सीधा लाभ सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। उन्हें कम समय में सटीक माप उपलब्ध हो सकेगा।