Panchayat Corruption : डीएम की कार्रवाई के बाद भी नहीं रुका खेल, भुगतान को लेकर नया खुलासा

    22-May-2026
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महराजगंज। 
जनपद के लक्ष्मीपुर ब्लॉक स्थित सिसवनिया विशुन ग्राम पंचायत में कुछ वक़्त पहले मनरेगा और पंचायत कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया था। जांच में लाखों रुपये के सरकारी धन के दुरूपयोग के आरोप लगे थे जिसके सामने आने के बाद जिला प्रशासन और पंचायत विभाग ने बड़ी कार्रवाई की थी।
ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर हुई जांच में मनरेगा कार्यों और विकास योजनाओं में गंभीर गड़बड़ियों के संकेत मिले थे। इस जांच में 6.37 लाख रुपये के दुरूपयोग की पुष्टि हुई थी जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने ग्राम प्रधान के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे और पंचायत के संचालन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी थी।


प्रधान मुराती देवी के सभी अधिकार सीज होने के बाद गाँव में विकास कार्यों के लिए डीएम द्वारा अमरेश कुमार को कार्यवाहक प्रधान नियुक्त किया गया, जिनके द्वारा कराये गए कार्यों का भुगतान रोककर अपनी बहाली के बाद मुराती देवी ने अपने प्रधान प्रतिनिधि राम सहाय पांडेय और सचिव बृजेश कुमार यादव के साथ मिलकर यह दिखाया कि कार्य उनके द्वारा कराये गए हैं और उसका सारा भुगतान स्वयं धोखे से निकाल लिया था, जबकि डीएम ने यह आदेश दिया था कि जो भी कार्य सहायक प्रधान द्वारा करवाए गए हैं उनका भुगतान बहाली प्रधान जल्द से जल्द कर दें, इस आदेश की पूर्ण रूप से अवहेलना हुई।


इतना ही नहीं मुराती देवी के लेटर हेड पर प्रधान सहायक का नाम भी है।


आशीष चौधरी की शिकायत पर डीपीआरओ श्रेया मिश्रा ने स्वयं गाँव में जाकर पिछले 5 सालों में प्रधान द्वारा कराये गए विकास कार्यों की जांच की, जिसमे उन्होंने पाया कि विकास कार्यों के नाम पर सिर्फ धन का दुरूपयोग और धन का गबन किया गया है। सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए न तो पीने का पानी है, न बैठने के लिए चबूतरा न पंखे, यही हाल पंचायत भवन का था, वहां की स्थिति भी बेहद ख़राब थी।


पंखों से लेकर शौचालय तक सब टूटा फूटा और ख़राब हालत में था। सबसे बड़ी बात कि वहां की पंचायत सहायक एक महिला है जिसके लिए वहां शौचालय तक नहीं है। यह सब देखते हुए डीपीआरओ ने नाराज़गई जाहिर की और सचिव बृजेश कुमार यादव और सफाईकर्मी राजकुमार को तत्काल निलंबित कर दिया और साथ ही मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार ग्राम पंचायत में कराए गए विभिन्न विकास कार्यों को लेकर लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं। आरोप है कि पंचायत में बिना मानक के कार्य कराए गए, कई योजनाओं में खर्च दिखाया गया लेकिन धरातल पर काम अधूरा या संदिग्ध मिला। शिकायतों के बाद जब विभागीय स्तर पर प्रारंभिक जांच कराई गई तो कई बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले। जिसमें ग्राम प्रधान ने 5 साल मे जितना विकास कार्य करवाया था उसमें साफ तौर पर धरातल पर 9 लाख रुपये का गबन विकास कार्य के नाम पर देखने को मिला आगे जांच चल रही है । अब इन्हीं कार्यों की जांच तेज कर दी गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो यदि जांच में गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों से रिकवरी भी कराई जाएगी। इससे पंचायत से जुड़े कई लोगों की चिंता बढ़ गई है।