Cost Of Education in 2026-27 : स्कूल खुलते ही महंगाई की मार ! कॉपी से टिफिन तक सब महंगा
29-Jun-2026
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Cost Of Education in 2026-27 : नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर महंगाई की मार और बढ़ गई है। कॉपी, किताब, स्कूल बैग और अन्य स्टेशनरी सामग्री के दामों में बढ़ोतरी होने से बच्चों की पढ़ाई का खर्च पिछले साल की तुलना में काफी बढ़ गया है। पिछले साल जहाँ पहले प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों की शैक्षणिक सामग्री ढाई से तीन हजार रुपये में मिल जाती थी, वहीं अब इसके चार से पांच हजार तक चुकाने पड़ रहे हैं। सबसे ज़्यादा तो प्लास्टिक टिफिन, पानी की बाॅटल महंगे हो गए हैं।
व्यापारियों का कहना है कि कागज की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण नोटबुक और रजिस्टर महंगे हो गए है। एक नोटबुक की कीमत में पांच से दस रुपये तक की वृद्धि हुई है।
जिसके कारण पांचवीं तक बच्चों के लिए स्कूल बैग, कापी किताब व स्टेशनरी की खरीद करने में अभिभावकों के पसीने छूट रहे। बर्रोहिया ढाला निवासी कारोबारी राजकिशोर अग्रवाल का कहना है कि किताबों पर पांच प्रतिशत जीएसटी लागू है जबकि अधिकांश स्टेशनरी उत्पादों पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगती है। इसके अलावा कागज की बढ़ती कीमतों ने भी उत्पादन लागत बढ़ा दी है।
उन्होंने बताया कि एलकेजी के बच्चों के लिए हल्की क्वालिटी वाला स्कूल बैग भी अब 150 रुपये से कम में नहीं है। जबकि 1000 पेज वाली नोटबुक की कीमत जो पिछले साल 360 रुपये थी, जो अब बढ़कर 384 रुपये की हो गयी।
अभिभावकों का कहना है कि निजी स्कूलों की ओर से निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदने की व्यवस्था के कारण उनकी परेशानी और बढ़ जाती है, जिस दुकान से स्कूलों का कमीशन सेट रहता है वे वहीं कापी, किताब व अन्य स्टेशनरी रखवाते हैं। नितीश कुमार पांडेय, संजीव वर्मा, नीरज कन्नौजिया व अखिलेश ने बताया कि बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाना मुश्किल होता जा रहा है।
प्रशासन की सख्ती के बाद अब स्कूल एक के बजाय दो-तीन दुकानों पर किताबें उपलब्ध करा रहे हैं, लेकिन किताबें अब भी सीमित दुकानों पर ही मिलती हैं, जिससे अभिभावकों के पास विकल्प कम रहते हैं और खर्च बढ़ जाता है।