Panchayat Investigation Pakdi Siswa : चार साल से जांच का इंतजार ! पूर्व NSG कमांडो के शिकायत पत्र ने खड़े किए कई सवाल

    03-Jun-2026
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महराजगंज। चार साल में अधर में पंचायत जांच! पकड़ी सिसवा में नाली इंटरलॉकिंग निर्माण कार्य और तालाब की भूमि से जुड़े विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। ग्रामीण जयप्रकाश गुप्ता (जोकि एक पूर्व NSG कमांडो हैं) ने उच्च अधिकारियों को प्रार्थनापत्र भेजकर पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि वर्ष 2022 से शिकायतें किये जाने के बाद भी आज तक वास्तविक स्थिति की जांच नहीं कराई गयी है और प्रकरण को बार बार कागज़ी आख्या के आधार पर निस्तारित कर दिया गया।

जयप्रकाश गुप्ता के अनुसार, 12 मई 2022 को मुख्य विकास अधिकारी द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर सात दिन के भीतर स्थलीय जांच का आदेश दिया गया था लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। बाद में विभागीय स्तर पर भी यह स्वीकार किया गया कि पूर्व में की गयी जाँच वास्तविक स्थिति के अनुरूप नहीं थी। इसके बावजूद मामले की दोबारा निष्पक्ष जांच करने के बजाय पुराणी रिपोर्टों के आधार पर शिकायतों का निस्तारण होता रहा।

जय प्रकाश गुप्ता का कहना है कि 26 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी को विस्तृत शिकायत दी गई थी, लेकिन करीब चार माह बाद 7 मई 2026 को जांच का आदेश जारी हुआ। उनका आरोप है कि यह देरी प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है।

निर्माण कार्यों के खर्च और भुगतान पर भी सवाल
जयप्रकाश गुप्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 में कराये गए नाली और इंटरलॉकिंग निर्माण कार्यों में हुए खर्च, भुगतान और मरम्मत कार्यों की वित्तीय एवं तकनीकी जांच ज़रूरी है। उनका कहना है कि विभिन्न अधिकारियों द्वारा समय समय पर परस्पर विरोधाभासी रिपोर्टें प्रस्तुत की गयीं, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट ही नहीं हो पा रही।


तालाब भूमि को लेकर भी विवाद
शिकायतकर्ता ने तालाब की भूमि का मुद्दा भी उठाया गया है। उनका कहना है कि तालाब की भूमि के कुछ हिस्सों पर अतिक्रमण कर निर्माण कार्य कराए गए हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों का हवाला देते हुए तालाब भूमि की स्थिति का राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अलग-अलग समय पर भूमि संबंधी अलग-अलग रिपोर्टें दी गईं, जिससे प्रकरण और उलझ गया। उन्होंने राजस्व अभिलेखों के आधार पर मौके का सत्यापन कराकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

जनसुनवाई पोर्टल पर भी नहीं मिला समाधान
जयप्रकाश गुप्ता का कहना है कि उन्होने कई बार जनसुनवाई पोर्टल (IGRS) पर शिकायत दर्ज कराई और असंतोष भी जताया, लेकिन ब्लॉक, जिला और मुख्य विकास अधिकारी स्तर पर बिना स्वतंत्र जांच के पुरानी आख्या को ही आधार बनाकर शिकायतों का निस्तारण कर दिया गया।

RTI से खुला मामला
शिकायतकर्ता जयप्रकाश गुप्ता द्वारा ऑनलाइन RTI के माध्यम से जानकारी मांगी गई, किन्तु जवाब न मिलने पर प्रथम अपील और उसके बाद द्वितीय अपील की गई। सूचना आयोग, लखनऊ द्वारा द्वितीय अपील स्वीकार करते हुए DPRO को नोटिस जारी कर तलब किया गया है।

उच्चस्तरीय जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि वर्ष 2022 से अब तक हुई सभी जांचों की समीक्षा कराई जाए, जांच में हुई देरी के कारणों की पड़ताल कर जिम्मेदारी तय की जाए तथा पूरे मामले की जांच जिला या मंडल स्तर से ऊपर किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही उन्होंने मौके पर वास्तविक स्थलीय निरीक्षण और तालाब की भूमि का राजस्व अभिलेखों के आधार पर सत्यापन कराने की भी मांग की है।

जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि 2022 से वे शिकायत दर्ज करा रहे हैं जब भी वे छुट्टियों में घर आते थे, स्थिति वहीं की वहीं रहती थी, कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है अगर एक सरकारी कर्मचारी की इतनी शिकायतों और RTI दर्ज करने के बाद भी कुछ नहीं हो सका तो आम आदमी की शिकायतों की क्या स्थिति होगी। उनका कहना है कि निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई से ही ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा कायम रह सकेगा। फ़िलहाल जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।