Tourist Place In Maharajganj : 3 एकड़ में बसा प्रकृति का अनमोल खजाना, लेकिन आम लोगों के लिए अब बंद है यह जगह
13-Jul-2026
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महराजगंज। फरेंदा कस्बे का प्रेम पोखरा प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक वातावरण और ऐतिहासिक विरासत का अनूठा संगम है। तीन एकड़ में फैला यह परिसर हरियाली, दुर्लभ पौधों, मंदिर, धर्मशाला और शांत वातावरण के कारण विशेष पहचान रखता है। हालांकि वर्तमान में यह स्थल आम लोगों के लिए बंद है।
प्रेम पोखरा का निर्माण फरेंदा कस्बे के प्रेम चंद सर्राफ द्वारा वर्ष 1959 में बनाया गया था। करीब 42 साल की आयु में प्रेम चंद सर्राफ इस पोखरे को बनवाने के लिए सोचा तो उस वक्त उन्हें सेठ आनंदराम जयपुरिया इंटर कॉलेज के प्रवक्ता मथुरा मणि शास्त्री ने हौसला बढ़ाया। तीन एकड़ में बने इस प्रेम पोखरे के प्राकृतिक सौंदर्य को देख हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
जब यह पोखर बन रहा था तो तमाम लोगों ने श्रमदान भी किया था। समाज के हर वर्ग के लोगों ने श्रम दान किया था। वर्ष 1994 में प्रेम चंद सर्राफ के निधन के बाद उनके परिवार ने इसकी देखरेख की जिम्मेदारी संभाली और परिसर के संरक्षण एवं विकास का कार्य जारी रखा।
हरिप्रसाद सर्राफ बताते हैं कि पिता जी ने इसे मन से बनाया था। उनकी आध्यात्मिक सोच का नमूना इस प्रेम पोखरे पर देखने को मिलता है। पहले इसे राधाकृष्ण वाटिका मंदिर के नाम से जाना जाता था। लेकिन अब इसे प्रेम पोखरे के नाम से जाना जाता है। वर्तमान समय में यहां आम लोगों का आना बंद है।
प्रेम पोखरे पर बने बाटिका में रूद्राक्ष का पौधा लगाया गया है। इसके अलावा अमरूद, संतरा, लीची, चिकु, आम, खरीनी का पौधा भी लगा है। अंदर बैठने के लिए बेंच लगा है। पोखरे में फव्वारा लगा है। रात में समय में रंग विरंगी लाइट के बीच फव्वारे अच्छे लगते हैं।
प्रेम पोखरा परिसर में फूलवारी भी लगी है। जहां तमाम तरह की फूल पत्तियां भी लगी है। परिसर में सुंदर फूलों की वाटिका, धर्मशाला तथा राधा-कृष्ण और भगवान शिव के मंदिर भी बने हुए हैं। शांत और प्राकृतिक वातावरण के कारण यह स्थल आध्यात्मिक अनुभूति के साथ मानसिक सुकून का भी एहसास कराता है।