UP News : 21 साल पुराने मधुमिता हत्याकांड की फिर गूंज, अब बहन के घर धमाके का दावा
02-Jul-2026
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लखीमपुर। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में चर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मधुमिता शुक्ला उत्तर प्रदेश की उभरती हई कवयित्री थीं। 9 मई 2003 को लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी में उनकी सनसनीखेज हत्या ने उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में भी हलचल मचा दी थी। मधुमिता को इंसाफ दिलाने की जंग लड़ने वाली उनकी बहन निधि शुक्ला को इन दिनों अपनी जान का डर सता रहा है।
निधि शुक्ला ने दावा किया कि बुधवार तड़के करीब तीन बजे उनके घर के बाहर बम से हमला किया गया है। उन्होंने सदर कोतवाली में शिकायत देकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उनके परिवार का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
निधि शुक्ला का कहना है कि यह हमला उन्हें डराने-धमकाने और मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में चल रही कानूनी लड़ाई से पीछे हटाने के उद्देश्य से कराया गया है। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य के साथ कोई भी अप्रिय घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी हमला कराने वालों की होगी। उन्होंने पुलिस से अपनी सुरक्षा तत्काल बढ़ाने और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
बता दें कि निधि शुक्ला शहर के मिश्रनान मोहल्ले में रहती हैं। उनके मुताबिक 30 जून और 1 जुलाई की दरमियानी रात करीब 3 बजे घर के बाहर जोरदार धमाका हुआ। उस वक्त वह परिवार के साथ घर के अंदर सो रही थीं. उन्होंने बताया कि उनकी सुरक्षा में तैनात सिपाही ने घबराकर फोन किया और कहा कि बाहर बम विस्फोट जैसा तेज धमाका हुआ है। इस दौरान सिपाही ने उन्हें दरवाजा खोलने को कहा लेकिन सुरक्षा कारणों के चलते उन्होंने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद डायल-112 को सूचना दी गई। जब पुलिस घर के बाहर पहुंची तो उन्होंने दरवाजा खोला और फिर उन्हें विस्फोट की जानकारी दी गई।
निधि शुक्ला ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में उनके लिए तीन सशस्त्र और एक सिविल पुलिसकर्मी की सुरक्षा स्वीकृत है, लेकिन पिछले एक वर्ष से दिन में केवल एक सिपाही और रात में एक सिपाही ही तैनात रहता है। निधि शुक्ला ने दावा किया कि यह पहली घटना नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष भी उनके घर पर फायरिंग हुई थी, लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई। उनका कहना है कि उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।
गौरतलब है कि साल 2003 में 9 मई को लखनऊ के पेपर मिल कॉलोनी स्थित घर में मधुमिता शुक्ला की हत्या कर दी गई थी. जांच के दौरान सामने आया था कि मधुमिता सात माह की गर्भवती थीं। डीएनए जांच में गर्भस्थ शिशु का संबंध तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रहे अमरमणि त्रिपाठी से जुड़ा बताया गया था।