महराजगंज। श्रावण माह के प्रथम दिन निचलौल क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पंचमुखी शिव मंदिर, इटहिया में शिवभक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। 'हर-हर महादेव' और 'जय भोलेनाथ' के जयघोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा। भारत-नेपाल सीमा से सटे इस ऐतिहासिक शिवधाम में भारतीय श्रद्धालुओं के साथ बड़ी संख्या में नेपाली श्रद्धालु भी जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।
महराजगंज जिला मुख्यालय से 31 किलोमीटर दूर रंगहिया बाजार मार्ग पर डुमरी ग्रामसभा में स्थित यह मंदिर 'मिनी बाबा धाम' के नाम से जाना जाता है। सावन के दौरान यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
इस मंदिर की मान्यता निचलौल स्टेट के प्रतापी राजा वृषभ सेन से जुड़ी है। मान्यताओं के अनुसार, राजा की गोशाला में 'नंदिनी' नामक एक गाय थी। राजा प्रतिदिन उसके प्रथम दर्शन कर दूध ग्रहण करते थे। कुछ समय बाद गाय प्रतिदिन जंगल में एक विशिष्ट स्थान पर स्वतः दूध अर्पित करने लगी।
जब राजा को इस बात का पता चला, तो उन्होंने उस स्थान की खुदाई करवाई, जहां से अति दिव्य और दुर्लभ पंचमुखी शिवलिंग प्रकट हुआ।
मंदिर के मुख्य पुजारी ध्यान गिरी ने बताया, "पंचमुखी शिवलिंग दिव्य ऊर्जा और आस्था का विशाल केंद्र है। सावन में यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। कोई भी शिवभक्त बाबा के दरबार से खाली हाथ नहीं लौटता।"
भक्तों की सुविधा को देखते हुए महराजगंज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए निचलौल मुख्य तिराहे से पूरे दिन ऑटो और ई-रिक्शा की व्यवस्था की गई है। वहीं नेपाल सीमा से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठूठीबारी, शीतलापुर, रेंगहिया, झुलनीपुर और महेशपुर से मंदिर तक विशेष वाहन संचालित किए जा रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
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