महराजगंज। भीषण गर्मी में गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव पूर्व जांच कराना किसी परेशानी से कम नहीं है। महराजगंज के महिला अस्पताल के एमसीएच विंग में लगी अल्ट्रासाउंड मशीन पिछले करीब छह साल से बंद पड़ी है। ऐसे में यहां जांच के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए करीब 500 मीटर दूर जिला अस्पताल तक जाना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, महिला अस्पताल के एमसीएच विंग की ओपीडी में रोजाना 150 से 200 महिलाएं जांच-इलाज के लिए आ रही हैं। इनमें से एएनसी यानी एंटीनेटल जांच-इलाज कराने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या तकरीबन 100 से 125 रोजाना होती है और इसमें से 20 से 25 गर्भवती महिलाओं व अन्य महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच की जरूरत होती है।
दरअसल एमसीएच विंग में लगी अल्ट्रासाउंड जांच करने के लिए सोनोलॉजिस्ट की तैनाती ही नहीं हुई। इसलिए करीब छह साल से यहां पर अल्ट्रासाउंड जांच किया ही नहीं जा रहा है। करीब चार साल पहले महिला चिकित्सक को सोनोलॉजिस्ट की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। लेकिन प्रशिक्षण के बाद उनका तबादला गैरजनपद हो जाने के कारण ये इंतजाम भी अल्ट्रासाउंड जांच शुरू कराने में निष्फल साबित हुआ।
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा निशुल्क है, जबकि निजी जांच केंद्रों पर इसके लिए करीब 900 से 1200 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर गर्भवती महिलाओं के लिए निजी जांच कराना अतिरिक्त आर्थिक बोझ बन रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एमसीएच विंग में अल्ट्रासाउंड मशीन पहले से मौजूद है, तो छह साल बाद भी यहां जांच सेवा क्यों शुरू नहीं हो सकी? गर्भवती महिलाओं को राहत देने के लिए सोनोलॉजिस्ट की तैनाती कब होगी और एमसीएच विंग की बंद पड़ी अल्ट्रासाउंड सेवा कब शुरू होगी, यह अब देखने वाली बात होगी।
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