Gold Dust Business : कूड़े जैसी दिखने वाली धूल की कीमत लाखों में! महराजगंज में ऐसे बिकता है ‘नियारा’

    17-Aug-2026   
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Gold Dust Business
: आम तौर पर सराफा दुकान की सफाई के बाद निकलने वाली धूल को लोग बेकार समझ सकते हैं, लेकिन महराजगंज में यही धूल लाखों रुपये की कीमत रखती है। यहां हाथ से आभूषण तैयार करने वाली करीब 12 से अधिक दुकानों से निकलने वाली धातु मिश्रित धूल को ‘नियारा’ कहा जाता है। इसकी खरीद के लिए पूरे साल की एडवांस बुकिंग होती है। तीन-तीन माह पर खरीदार धूल ले जाते हैं। एक साल के धूल की कीमत दो से तीन लाख रुपये है।

जिले में अब अधिकतर आभूषणों का निर्माण मशीनों के जरिये किया जा रहा है। इसके बावजूद जनपद मुख्यालय पर 12 से अधिक सराफा कारोबारी अपने यहां हाथ से आभूषण तैयार करवाते हैं। सोने और चांदी के आभूषणों की कटिंग, घिसाई और सफाई के दौरान धातु के बेहद सूक्ष्म कण फर्श पर गिरते हैं और धूल में मिल जाते हैं। ये कण इतने महीन होते हैं कि सामान्य तौर पर आंखों से दिखाई नहीं देते। दुकान की रोजाना सफाई के बाद निकलने वाली इस धूल को सुरक्षित रखा जाता है।

सोने व चांदी के आभूषण बनाने वाले गिरीश वर्मा ने बताया कि आभूषण तैयार करते समय सोने-चांदी की कटिंग व सफाई में महंगी धातुओं के सूक्षमकण निकलते रहते हैं। काफी सूक्ष्म होने के कारण यह आंख से नहीं दिखते। इसलिए दुकान की सफाई के बाद निकलने वाली हर दिन की धूल को डस्टबिन में सुरक्षित रखा जाता है। नियारा खरीदने के लिए दूरदराज से कारोबारी आते हैं।

आभूषण कारीगरों के मुताबिक नियारा की मांग इतनी अधिक है कि खरीदार पूरे साल की धूल की एडवांस बुकिंग तक कर लेते हैं। तीन महीने में एक बार खरीदार दुकानों से नियारा उठाने पहुंचते हैं।

महराजगंज मुख्यालय पर कुछ दुकानों की सालभर की नियारा दो से तीन लाख रुपये तक में बुक होने की बात सामने आई है। कई खरीदार इसके लिए पहले ही एडवांस भुगतान कर देते हैं।

नियारा खरीदने वाले कारोबारी इसे अपने वर्कशॉप में ले जाकर उच्च तापमान पर शोधित करते हैं। इस प्रक्रिया में धूल में मौजूद सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं को अलग किया जाता है।


कारोबारियों के अनुसार, एक दुकान से पूरे साल में मिलने वाले नियारा से करीब 70 से 75 हजार रुपये तक की आय हो सकती है। नेपाल से आने वाले नियारा में कीमती धातुओं की मात्रा अधिक होने पर कमाई की संभावना भी बढ़ जाती है।

नेपाल में आज भी हैंडमेड ज्वैलरी का क्रेज है। वहां से आने वाले नियारा में अधिक कमाई की संभावना रहती है।

भारतीय क्षेत्र में भले ही मशीनों के आने से हैंडमेड ज्वैलरी का क्रेज घटा है लेकिन नेपाल में अभी भी हैंडमेड ज्वैलरी का क्रेज है यही वजह है कि वहां छोटी दुकानों की सालभर की धूल भी लाखों रुपये में बुक होने की बात सामने आती है।

हाल ही में नेपाल से 13.62 टन नियारा 125 बोरियों में भरकर डीसीएम के जरिए बिना कस्टम शुल्क भारत लाए जाने का मामला सामने आया था। कस्टम विभाग ने नियारा जब्त कर संबंधित लोगों पर जुर्माना लगाया था। इस कार्रवाई के बाद सराफा दुकानों से निकलने वाली इस ‘कीमती धूल’ को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।


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