महराजगंज। जन्मजात बीमारियों, कुपोषण और विकास संबंधी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने 'प्रोजेक्ट पहचान' की शुरुआत की है। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल की पहल पर शुरू इस अभियान के तहत छह वर्ष तक के बच्चों में 28 प्रकार की गंभीर बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी कमियों की शुरुआती स्तर पर पहचान कर इलाज सुनिश्चित किया जाएगा।
अभियान के तहत सीएचओ, एएनएम, आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 222 में से 185 क्लस्टर में प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। प्रशिक्षण के बाद गांव-गांव बच्चों की स्क्रीनिंग शुरू होगी।
स्क्रीनिंग के दौरान बच्चों की जांच 'फोर-डी' (4D) मॉडल के आधार पर की जाएगी। इसमें जन्मजात शारीरिक दोष, पोषण एवं खून की कमी, बचपन की बीमारियां तथा विकास में देरी और दिव्यांगता से जुड़ी समस्याओं की पहचान की जाएगी। रीढ़, हृदय, मस्तिष्क, आंख-कान की विकृतियां, गंभीर एनीमिया, कुपोषण, टीबी, कुष्ठ, ऑटिज्म, दौरे, देर से बोलना या चलना तथा उंगलियों के जुड़े होने जैसी समस्याओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
डीएम गौरव सिंह सोगरवाल का कहना है कि प्रोजेक्ट पहचान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के स्वास्थ्य की सटीक ट्रैकिंग और उन्हें समय पर चिकित्सकीय मदद पहुंचाना है। इस पहल से अति गंभीर एवं कुपोषित बच्चों को शुरुआती चरण में ही चिह्नित कर उन्हें बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर बच्चों की स्क्रीनिंग करेंगी। प्रत्येक ग्राम पंचायत में 'प्रोजेक्ट पहचान' रजिस्टर के माध्यम से बच्चों का स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार किया जाएगा। जांच के बाद बच्चों को सामान्य, निगरानी और रेफरल श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा। रेफरल श्रेणी के बच्चों का अस्पताल में उपचार और जांच पूरी होने तक उनकी सतत निगरानी की जाएगी।
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