महराजगंज। पनियरा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत बैदा की रहने वाली अनारी देवी, आरती और कुशमावती ने बकरी पालन से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। शुरुआती कठिनाइयों के बावजूद महिलाओं ने मेहनत से आत्मनिर्भरता की राह अपनाई। अब महिलाओं दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं।
जानकारी के अनुसार, करीब छह वर्ष पहले इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। खेती और मजदूरी पर निर्भर परिवारों की आय अनिश्चित थी। अनारी देवी, आरती और कुशमावती ने बकरी पालन करने का निर्णय लिया। शुरुआत में बहुत कम संख्या में बकरी पालन की।
पशुपालन विभाग और स्वयं सहायता समूहों की भूमिका उनके लिए सहारा बनी। विभाग की ओर से उन्हें बकरी पालन से जुड़ा प्रशिक्षण, टीकाकरण, चारा प्रबंधन, नस्ल सुधार और रोग नियंत्रण की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण से उनका आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन करना शुरू किया।
समय के साथ इन महिलाओं ने बकरियों की नियमित देखभाल, समय पर टीकाकरण, संतुलित आहार और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। वर्तमान समय में अनारी देवी, आरती और कुशमावती के पास लगभग 35-35 बकरियां हैं। बकरियों के बच्चों की बिक्री और दूध से होने वाली आय ने उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बना दिया है।
अनुमान के अनुसार, तीनों महिलाओं को एक वर्ष में करीब एक लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है। अनारी देवी, आरती और कुशमावती का कहना है कि बकरी पालन ग्रामीण महिलाओं के लिए एक बेहतर और सुरक्षित स्वरोजगार का माध्यम है। यह व्यवसाय कम लागत में शुरू हो जाता है और कम समय में आय देना शुरू कर देता है।