Maa Lehra Devi Temple : पांडवों से लेकर अंग्रेजों तक ! रहस्यों में घिरा महराजगंज का ये देवी स्थान

    05-May-2026
Total Views |

शिवानी

Maa Lehra Devi Temple : उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में वैसे तो बहुत से देवी स्थान हैं लेकिन मां लेहड़ा देवी का मंदिर आस्था, इतिहास और रहस्य का अनोखा संगम है। ये मंदिर भारत में उत्तर हिमालय की तराई में महाराजगंज की फरेंदा तहसील से नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

अर्जुन ने की स्थापना और पांडवों ने की थी उपासना

पुराने समय में यह स्थान आर्द्र वन नाम के सघन जंगल से घिरा हुआ था। पवह नदी के तट पर मां वनदेवी दुर्गा का मंदिर है। ऐसा कहा जाता है, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां मां की अराधना की और द्रोपदी का आंचल फैलाकर आशीर्वाद मांगा और माँ ने पांडवो को विजय का आशीर्वाद दिया था। अर्जुन ने इस जगह पर वनदेवी की पूजा की थी। उनकी पूजा से प्रसन्न होकर वनदेवी मां भगवती दुर्गा ने उसे अमोध शक्तियां प्रदान की थीं। मां के दरबार में हाजिरी लगाने से हर पाप मिट जाते हैं और मन की मुराद पूरी होती है।

इस मंदिर में हर साल लाखों की भीड़ होती है। मां के दरबार की फैली लोकप्रियता के कारण यहां भारत के अनेक राज्यों के साथ-साथ नेपाल से भी काफी संख्या में मां के भक्त आते हैं। यहां पर जो कोई भी सच्चे दिल से मन्नत मांगता है उसकी हर मुराद जरूर पूरी होती है। इस मंदिर में एक प्रथा है, जो भी यहां नर्तकी को अपने आंचल पर नचावत है, उसकी हर मुराद पूरी होती है। इसलिए यहां हर समय नृत्य होता रहता है। शादी विवाह और मुंडन के कार्यक्रम भी यहां होते हैं।


प्रसिद्ध है ये कथा

मान्यता है कई हजार साल पहले यहां एक नदी बहती थी, जहां एक दिन माँ को एक किशोरी के रूप देखा गया था। मां की सुंदरता से आशक्त हो एक नाविक ने उनसे छेड़खानी करनी चाही, जिस पर क्रोधित होकर माँ ने नाविक और नाव के साथ उसी क्षण जल समाधि ले ली। आज भी वह नदी बहती है, नाव के अवशेष दिखते है।

एक और कथा जुड़ी है मंदिर से


इसको लेकर एक कथा और प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि अंग्रेजों के शासनकाल में एक दिन सैन्य अधिकारी शिकार करते-करते इस मंदिर की ओर आ गए। जब उन्होंने मंदिर पर भक्तों की भीड़ देखी तो पिंडी पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी। देखते ही देखते वहां खून की धारा बह निकली। इतना खून देखकर अंग्रेज ऑफिसर डर गया और अपनी कोठी की तरफ भागा। रास्ते में उसकी और घोड़े की मौत हो गई। इस अंग्रेज बाबू की कब्र मंदिर से लगभग एक किलोमीटर दूर पश्चिम में बनाई गई है। इस घटना के बाद भक्तों की श्रृद्धा मां जगदम्बा के प्रति और बढ़ गई। अब इस मंदिर में माता के दर्शन को देश के कोने-कोने से श्रद्धालु आते है।

आज भी यह मंदिर अपने इतिहास, आस्था और धार्मिक महत्व के लिए लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आपको भी जब मौका मिले तो माता के इस दरबार में हाज़िरी लगाएं और अपने मन की मुराद पूरी होने का वरदान माँ से मांगे।